सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने लिखित जवाबों और बयानों के साथ तकनीकी जांच का सहारा लिया है। सूत्रों के अनुसार इस जांच में कई अधिकारियों के दावे गलत साबित हुए हैं। एसआईटी को दिए गए लिखित जवाबों में कुछ अधिकारियों ने घटना स्थल पर पहुंचने का समय गलत बताया। वहीं कुछ ने हादसे के एक दिन बाद मौके पर जाने का दावा किया, जबकि वे दो दिन तक वहां नहीं पहुंचे। जिस अधिकारी को प्राधिकरण की ओर से जांच की जिम्मेदारी दी गई थी, वह भी तीन दिन तक सेक्टर-150 नहीं गया।
नीचे तक तय होगी जिम्मेदारी
एसआईटी अपनी रिपोर्ट में प्राधिकरण, पुलिस और बचाव दल की जिम्मेदारी स्पष्ट करेगी। इसमें नोएडा प्राधिकरण में कई स्तरों पर जिम्मेदारी तय होगी। हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम को हटाकर सख्त कार्रवाई का संदेश दिया था। अब जिम्मेदारी सीईओ के नीचे के स्तर पर तय की जानी है।
डिलीवरी बॉय का बयान लिया
चश्मदीद डिलीवरी बॉय मोनिंदर शनिवार को दोपहर बाद एसआईटी के सामने बयान दर्ज कराने के लिए पहुंचे। दोपहर बाद करीब 3 बजे प्राधिकरण दफ्तर में दाखिल हुए मोनिंदर रात में 8:30 बजे निकले। इस दौरान मोनिंदर का भाई नरेंद्र व पिता मेहर चंद बाहर इंतजार करते रहे। वापसी में मोनिंदर पुलिस सुरक्षा में निकला। भाई नरेंद्र ने बताया कि पुलिस सुरक्षा के साथ घर के लिए छोड़ने निकली। प्राधिकरण दफ्तर पहुंचने पर मोनिंदर ने कहा कि उन्होंने जो भी बोला है सच बोला है। वहीं मेहर चंद ने कहा कि उनका बेटा न तो बयानवीर है न ही अपराधी है।