उपचुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की कुछ न कुछ खास ताकतें होती हैं, जो उन्हें मंजिल तक पहुंचाती हैं। लेकिन उनकी कमजोरियां भी हैं, जो उन्हें पीछे खिसका सकती हैं। अमर उजाला ने इस सिलसिले में शहर के कई तबके के लोगों से बात की, प्रस्तुत है उसका निचोड़...
भाजपा : ताकत
- मजबूत संगठन
- पिछले लोकसभा और विधानसभा की जीत
- केंद्र में सरकार होने का लाभ
- प्रदेश सरकार से लोगों की नाराजगी का लाभ
- महिला प्रत्याशी होने का लाभ
कमजोरी
- पार्टी में प्रत्याशी को लेकर विरोध
- कमजोर प्रत्याशी होने का आरोप
- संगठन के लोग बिखरे हुए
- प्रत्याशी का धीमी गति से प्रचार
- बिहार समेत अन्य चुनावों में जीत का अंतर काम होना
कांग्रेस : ताकत
- बड़ी राष्ट्रीय पार्टी होना
- क्षेत्र की जनता से भलीभांति परिचित होना
- लंबा राजनीतिक अनुभव
- बेदाग और विवादों से दूर
- स्थानीय होने का लाभ
कमजोरी
- तोमर प्रकरण से पार्टी की छवि खराब
- पिछले विस चुनावों में पार्टी का चौथे स्थान पर रहना
- यूपीए सरकार की नीतियों का अभी तक जनता में गुस्सा
- अन्य पार्टियों के मुकाबले चुनाव प्रचार में पीछे
- बिखरे हुए संगठन का लाभ न मिलना
सपा - ताकत
- प्रदेश में पार्टी की सरकार होना
- पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का एकजुट होना
- परिवार का लंबा राजनीतिक अनुभव
- युवा और पढ़ी लिखी प्रत्याशी होना
- प्रचार में तेजी
कमजोरी
- पिछले चुनाव में पार्टी का कमतर प्रदर्शन
- बिजली, बढ़ते अपराधों को लेकर लोगों में गुस्सा
- शहरी वोट का अधिक साथ न होना
- परिवार के साथ पुराने विवाद होना
- चुनाव से पहले यहां राजनीति न करना