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दिल्ली एनसीआर के लिए उम्मीदों भरा फ्रेट कॉरिडोर

Thu, 13 Mar 2014 01:26 PM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा प्राधिकरण डीएफसीसी को गुलावली व झट्टा गांव में करीब 23 हेक्टेयर जमीन देने को राजी हो गया है। इसका प्रस्ताव शासन को भेजा है।
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वहां से अनुमति मिलते ही जमीन उपलब्ध करा दी जाएगी। प्राधिकरण के मुताबिक डेडीकेटेड फ्रंट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (डीएफसीसीआईएल) ने रेलवे ट्रैक, कॉर्पोरेट ऑफिस और आवासीय उपयोग के लिए करीब 23 हेक्टेयर जमीन मांगी है, जिसमें से 15.35 हेक्टेयर जमीन पहले मांगी गई थी।

इसके एवज में पैसा भी प्राधिकरण के खाते में जमा करा दिया है, लेकिन डीएफसीसीआईएल ने 7.50 हेक्टेयर जमीन और मांगी है। यह पूरी जमीन गुलावली और झट्टा गांव में है।
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डीएफसीसी को जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्राधिकरण ने बीते माह हुई बोर्ड बैठक में एजेंडा रखा था, जिस पर सदस्यों ने मुहर लगा दी है।

इस प्रस्ताव को अब शासन के पास भेजा गया है। वहां से अनुमति मिलते ही जमीन उपलब्ध कराने की योजना है। कुल 1483 किमी लंबे इस रूट के बनने से दिल्ली और मुंबई जुड़ जाएंगे। बोड़ाकी (दादरी) से शुरू होकर मुंबई बंदरगाह तक रेलवे लाइन बनेगी।

इसके रास्ते में उत्तर प्रदेश, दिल्ली एनसीआर, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र राज्य आएंगे। भारत और जापान की संयुक्त पहल से बनने वाले इस कॉरिडोर से औद्योगिक उत्पादों का सीधे आवागमन हो सकेगा।

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अभी माल ट्रकों के माध्यम से मुंबई भेजा जाता है, जहां से जल मार्ग के जरिये विभिन्न देशों को जाता है। इससे ज्यादा समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है।

इसका सर्वाधिक लाभ नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण के क्षेत्र में मौजूदा व भविष्य में आने वाले उद्योगों को मिलेगा। इसके मेमोरंडम ऑफ आर्टिकल पर 2006 में दोनों देशों की सरकारों ने हस्ताक्षर किए थे। हाल ही में प्रदेश सरकार इस महत्वपूर्ण परियोजना को हरी झंडी दिखा चुकी है।
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बढ़े मुआवजे की भरपाई डीएफसीसी से भी
प्राधिकरण के मुताबिक करीब 23 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध कराने के एवज में डीएफसीसी नोएडा प्राधिकरण को 56 करोड़ रुपये और देगा। दरअसल, प्राधिकरण ने नो प्रोफिट बेसिस पर 15.35 हेक्टेयर जमीन की कीमत करीब 36.53 करोड़ रुपये आंकी थी, जो डीएफसीसी ने जमा करा दिए। इसके बाद डीएफसीसी ने 7.50 हेक्टेयर जमीन और मांगी है। इस जमीन की कीमत 4885 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से करीब 34.39 हेक्टेयर आंकी गई है। साथ ही पहले दी गई जमीन का अतिरिक्त मुआवजा (64.7 फीसदी) भी किसानों को प्राधिकरण बांट चुका है। इसकी भरपाई के लिए करीब 22 करोड़ रुपये और जमा कराने को कहा है। यानी कुल मिलाकर अभी डीएमआईसी को करीब 56 करोड़ रुपये प्राधिकरण के खाते में और जमा कराने होंगे।
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