नोएडा प्राधिकरण ने सेक्टर-145 में 122 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्य, 315 करोड़ के ट्रांसमिशन उपकेंद्र, जर्जर सोसाइटियों के पुनर्विकास, पीपीपी मॉडल पर होटल और सेक्टर-164 में मैन्युफैक्चरिंग हब सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी। फ्लैट रजिस्ट्री में तेजी और नीतिगत सुधारों पर भी जोर दिया गया।
नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में शहर के विकास और नीतिगत सुधारों को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सेक्टर-145 में 122 करोड़ रुपये की लागत से सड़क, नाला, सीवर और बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई। साथ ही, 315 करोड़ रुपये के निवेश से 220 केवीए क्षमता वाले तीन ट्रांसमिशन उपकेंद्रों के निर्माण को हरी झंडी दिखाई गई।
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बोर्ड ने जर्जर सोसाइटियों के पुनर्विकास के लिए रिडेवलपमेंट पॉलिसी को मंजूरी दी। इसके तहत प्राधिकरण की पुरानी और जीर्ण-शीर्ण सोसाइटियों को तोड़कर 3.5 एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) के साथ नए सिरे से बनाया जाएगा, जो पहले 1.5 एफएआर पर बनी थी। इस प्रक्रिया में 70 प्रतिशत निवासियों की सहमति अनिवार्य होगी। डेवलपर पहले से बने फ्लैट्स दोबारा बनाकर निवासियों को सौंपेगा और शेष फ्लैट्स बेचकर अपनी लागत वसूल करेगा।
होटल निर्माण के लिए पीपीपी मॉडल के तहत दो प्लॉट्स (एक बड़ा, एक छोटा) निकालने का फैसला हुआ। इनका आवंटन ओपन बिड के जरिए होगा, जिसमें अधिक राजस्व देने वाले समूह को प्राथमिकता मिलेगी। मिक्स लैंड यूज शुल्क को पांच गुना करने का प्रस्ताव फिलहाल रोक दिया गया। छह श्रेणियों की प्लॉट स्कीम के ब्रोशर को मंजूरी दी गई, जो जल्द लॉन्च होगी। आईटी और कॉर्पोरेट ऑफिस के लिए 500 वर्ग मीटर से कम जगह को किराये पर देने की अनुमति दी गई। यूनिफाइड पॉलिसी में संशोधन करते हुए छोटे वाणिज्यिक प्लॉट्स और दुकानों के लिए कैपिटल कॉस्ट की शर्त को हटा दिया गया।
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सेक्टर-164 में मोबाइल और सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब के लिए छह बड़े प्लॉट्स आरक्षित किए गए। इसके अलावा, अमिताभ कांत समिति की सिफारिशों पर आधारित जीरो पीरियड पॉलिसी की स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की गई और फ्लैट रजिस्ट्री प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। ये निर्णय नोएडा में बुनियादी ढांचे, आवासीय सुविधाओं और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देंगे।