नोएडा-ग्रेटर नोएडा को संयुक्त राष्ट्र संघ ने ग्लोबल सस्टेनेबल सिटीज-2025 के यूनिवर्सिटी सिटी की रेस में शामिल किया है। पहले चरण में 3 से 4 माह में शहर की समस्याओं को दूर करने के लिए खाका तैयार किया जाएगा। जिससे कि 2025 में होने वाले वैश्विक स्तर की प्रतियोगिता में अच्छा प्रदर्शन किया जा सके। हालांकि इसका असर डेढ़ से दो साल बाद ही दोनों शहरों में दिखाई देगा। शुक्रवार को यह जानकारी डीएम बीएन सिंह ने सेक्टर-27 स्थित कैंप आफिस में पत्रकार वार्ता में दी।
उन्होंने बताया कि एक दशक पहले 193 देशों ने मिलकर सभी देशों और उनके शहरों के विकास के लिए एक प्रतियोगिता कराने का निर्णय लिया था। जिसमें 17 मुद्दों पर प्रतियोगिता का चयन किया गया था। इनमें एक यूनिवर्सिटी सिटी भी शामिल है। यूएन ग्लोबल सस्टेनेबल डेवलपमेंट (एसडीजी) शहरों की पहल से पांच श्रेणियों में दुनिया भर में कुल 25 शहरों का चयन किया गया है।
जिसमें भारत से केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा हैं। इससे शिक्षा समेत सभी तरह के सुधार किए जा सकेंगे। पहले चरण में शिक्षा, सफाई, प्रदूषण, जाम, स्वास्थ्य, कूड़े की समस्या आदि समस्याओं पर फोकस रहेगा। यूएनजीएसआईआई के वरिष्ठ सलाहकार अजय दावेसर ने बताया कि स्विटजरलैंड के दावोस में 21 से 25 जनवरी के बीच हुए सम्मेलन में इसकी घोषणा की गई थी।
क्या है ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स इंस्टीट्यूट
ग्लोबल सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स इंस्टीट्यूट फाउंडेशन की स्थापना मई-2014 में संयुक्त राष्ट्र के जेनेवा कार्यालय में हुई थी। फिलहाल इस संस्था की 72 देशों में एसडीजी लैब स्कूलों में चल रही है। जिसके माध्यम से 3 लाख बच्चों को इसका लाभ दिया जा रहा है। इसका मूल्यांकन 2030 तक किया जाएगा।
देशभर में नोएडा-ग्रेटर नोएडा को यूनिवर्सिटी सिटीज के लिए होनी वाली प्रतियोगिता के लिए चुना गया है। इसमें केवल शोध के लिए ही नहीं बल्कि फंडिंग के लिए भी लाभ हो सकता है। भारत में नोएडा-ग्रेटर नोएडा की अभी 58वीं रैंक है। लेकिन इसे सुधारा जाएगा। इससे दुनियाभर में नोएडा-ग्रेटर नोएडा की ब्रांडिंग के साथ विकास को लेकर भी कई आयाम सिद्ध होंगे।
- डॉ. शुभ्रो सेन, प्रधान सलाहकार भारत, एसडी सिटीज