देश में मतदाता से सीधे जुड़ने के लिए मोबाइल और सोशल मीडिया बड़ा माध्यम बनकर उभरा है। आम चुनाव के दंगल में उतरने वाले नेताओं को यह बखूबी पता है।
वे हर हाथ में मौजूद मोबाइल के जरिए लोगों से सीधे जुड़ना चाहते हैं। इसके लिए वे वीडियो गेम और मोबाइल एप्लीकेशन का सहारा ले रहे हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने नेताओं के इस मंसूबे पर पानी फेर दिया है।
चुनाव आयोग की ओर से सोशल मीडिया को लेकर जारी नई गाइडलाइंस में वर्चुअल दुनिया में नेताओं पर बने वीडियो गेम पर भी नजर रखी जाएगी।
सोशल मीडिया पर प्रचार की नई गाइडलाइन
चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को ऐसे गेम्स और एप्स की जानकारी देने के लिए कहा गया है। यही नहीं, उस पर प्रचार करने के लिए बाकायदा मीडिया सर्टिफिकेशन एंड मॉनिटरिंग कमेटी (एमसीएमसी) से अनुमति लेनी होगी।
बीते साल दिल्ली समेत पांच राज्यों में हुए चुनाव के दौरान आयोग ने आनन-फानन में सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार को लेकर गाइडलाइंस जारी की थी।
उसमें इंटरनेट के इस्तेमाल, फेसबुक अकाउंट, ट्विटर अकाउंट और वाट्स ऐप जैसे एप्लीकेशन को दायरे में रखा था। तब उम्मीदवारों से कहा गया था कि वे इसकी जानकारी नामांकन में देंगे। इस पर कोई भी प्रचार सामग्री डालने से पहले एमसीएमसी से मंजूरी लेनी होगी।
मोदी और केजरी का वीडियो गेम
दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टियों ने इसमें दिलचस्पी भी दिखाई थी। आम आदमी पार्टी ने कुल 24 सोशल मीडिया ऐड का इस्तेमाल किया था, जबकि बीजेपी ने चार और कांग्रेस को दो सोशल मीडिया सामग्री की मंजूरी दी गई थी।
आम चुनावों में अब दोबारा जो गाइललाइंस जारी की गई है, उसमें ये सब चीजें तो शामिल ही हैं, साथ ही वर्चुअल दुनिया में नेताओं पर बने वीडियो गेम और उनसे जुड़े मोबाइल ऐप की भी जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी।
बीते दिनों आम आदमी पार्टी के समर्थकों ने संयोजक अरविंद केजरीवाल को लेकर एक गेम जारी किया था। जबकि मोदी को लेकर एक वीडियो गेम बाजार में उतारा गया था।