चाहत से किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। दिल्ली के अस्पताल में पंजीकृत हो रहे कुछ बच्चे अपनी इसी चाहत की वजह से नशे की लत को छोड़ रहे हैं। यह सब कुछ वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टिट्यूट (वीपीसीआई) के विशेषज्ञों की निगरानी में हो रहा है। डॉक्टर बच्चों को तंबाकू छोड़ने की राह दिखाते हैं। बच्चों को थोड़ी कठिनाई होती है, लेकिन वह तंबाकू से तौबा करने की मंजिल पा ही लेते हैं।
आसानी से आते हैं चपेट में बच्चे
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे आसानी से तंबाकू सेवन की चपेट में आते हैं। बच्चे प्रभावशाली प्रचार, दूसरों को देखकर, पढ़ाई या दूसरे कारणों के तनाव के कारण तंबाकू का सहारा लेते हैं। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे विदेशी धूम्रपान, गुटखा, हुक्का का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं।
बच्चों पर केंद्रित है इस साल की थीम
विश्व तंबाकू निषेध दिवस 2024 की थीम बच्चों को तंबाकू उद्योग के हस्तक्षेप से बचाना है। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के युवाओं खासकर बच्चों में तंबाकू सेवन का चलन बढ़ रहा है। इसे रोकने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाने की जरूरत है।