रविवार को 26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले को 9 वर्ष पूरे हो गए। आतंकियों ने दो पांच सितारा होटलों समेत सीएसटी और एक यहूदी केंद्र को निशाना बनाया था। इसमें 160 लोगों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था।
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आतंकियों से मुकाबला करते हुए 18 पुलिसकर्मी व 2 एनएसजी कमांडो शहीद हो गए थे। इसके बाद से देश भर में पुलिस अलर्ट हो गई थी। कुछ महीनों तक तो पुलिस अलर्ट रही, लेकिन समय के साथ-साथ पुलिस अलर्ट एक बार फिर फाइलों में थम गया।
शहर की सुरक्षा तो दूर पूरे शहर में पुलिसकर्मी केवल हाई अलर्ट के समय कुछ समय के लिए दिखाई देते हैं। शहर के सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था महज दिखावा बन गई है। आतंकी हमले के 9 वर्ष बीत जाने के बाद भी शहर में सुरक्षा के नाम पर ढिलाई बरती जा रही है।
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देश की राजधानी दिल्ली के साथ लगे गुरुग्राम में मानो पुलिस का सुरक्षा व्यवस्था से कोई लेना देना नहीं है। रविवार को संवाददाता ने 26/11 की 9वीं बरसी पर शहर की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पेश है इसकी एक रिपोर्ट :
रेलवे स्टेशन..
railway station
- फोटो : सुदर्शन झा
साइबर सिटी हाईटेक तो है, लेकिन यहां का रेलवे स्टेशन हाईटेक नहीं है। यहां से रोजाना करीब 20 से 25 हजार यात्रियों सहित 80 यात्री ट्रेनाें और 10 मालवाहक ट्रेनों का आवागमन होता है।
यहां सुरक्षा के नाम पर यात्रियों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बिना किसी जांच के यात्री स्टेशन में प्रवेश कर जाते हैं। स्टेशन पर जाने के लिए एक मुख्य गेट के अलावा पांच से दस चोर रास्ते भी हैं, जिन पर विभाग का कोई ध्यान नहीं है।
मुख्य गेट पर यात्रियों की जांच के लिए लगाए गए मेटल डिटेक्टर भी सिर्फ दिखावे के लिए लगाए गए हैं। वहीं स्टेशन पर सुरक्षा को लेकर जीआरपी और आरपीएफ के दो थाने भी हैं, लेकिन उनके पास पर्याप्त स्टाफ नहीं है।
स्टेशन के आसपास के कॉलोनी के लोग स्टेशन होकर दूसरी ओर जाते हैं। इसलिए लोगों ने यहां से गुजरने के लिए कई चोर रास्ते बनाए हुए हैं। यहां किसी भी वारदात को बड़ी आसनी से अंजाम दिया जा सकता है।
बस स्टैंड...
गुरुग्राम बस अड्डा, यहाँ नहीं है सीसीटीवी की व्यवस्था
- फोटो : सुदर्शन झा
साइबर सिटी के कंडम घोषित हुए बस स्टैंड पर सुरक्षा भी कंडम होती नजर आ रही है। यहां पुलिस चौकी होने के बाद भी यहां पुलिस नजर नहीं आती है। यहां रोजाना 25 से 30 हजार यात्रियों का और करीब 250 बसों का आवागमन होता है।
यात्रियों की सुरक्षा के लिए विभाग ने कोई प्रबंध नहीं कर रखे हैं। रात के समय भी डिपो में खड़ी सैकड़ों बसों की सुरक्षा भी दो बुजुर्ग चौकीदारों के भरोसे है। बस स्टैंड परिसर में कोई सीसीटीवी भी नहीं लगाए गए हैं।
यहां दो मुख्य प्रवेश और निकास के रास्ते के अलावा दो चोर रास्ते भी बनाए गए हैं। इनका लोग शॉर्ट-कट रूप में प्रयोग करते हैं। बस स्टैंड पर बिना किसी जांच के ही आसानी से प्रवेश हो सकता है।
शहर का सबसे भीड़-भाड़ वाला क्षेत्र सदर बाजार है। यहां औसतन रोजाना 60 हजार लोग खरीददारी के लिए यहां आते हैं। लोगों की सुरक्षा को लेकर यहां हाल ही में नगर निगम ने यहां सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं।
उसी की भरोसे पुलिसवालों यहां से अक्सर गायब रहते हैं। यहां पुलिस बूथ धूल फांक रहा है। निगम द्वारा लगाए गए सीसीटीवी कैमरे भी सिर्फ मुख्य बाजार के कुछ हिस्से को कवर कर रहे हैं।
यहां हमेशा काफी भीड़ रहती है। ऐसे में अगर कोई बीच गलियों से बाजार में प्रवेश कर वारदात को अंजाम देता है तो कैमरों की नजर से आसानी से बच सकता है। यहां पुलिस प्रशासन हजारों लोगों की सुरक्षा और जिंदगी दोनों के साथ खिलवाड़ कर रहा है।