बृहस्पतिवार तड़के से ही दिल्ली में घने बादल छाए रहे। कई इलाकों में बारिश, गरज-चमक और 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से हवाएं चलीं। इसके बावजूद प्रदूषण से बड़ी राहत नहीं मिली। 26 अक्तूबर को एक्यूआई 174 दर्ज किया गया था, जो 27 अक्तूबर को बढ़कर 197 और 28 अक्तूबर को 229 पहुंच गया। बृहस्पतिवार को इसमें मामूली सुधार दर्ज किया गया।
दिल्ली से ज्यादा प्रदूषित रहे एनसीआर के कई शहर
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के 29 अक्तूबर के आंकड़ों के अनुसार, एनसीआर के कई शहरों में दिल्ली से ज्यादा प्रदूषण रहा। राजस्थान के भिवाड़ी में एक्यूआई 302 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में है। बल्लभगढ़ में यह 274 और गुरुग्राम में 240 रहा। नोएडा का एक्यूआई 222 और ग्रेटर नोएडा का 214 दर्ज किया गया। वहीं, गाजियाबाद में 147 और फरीदाबाद में 122 के साथ हवा की गुणवत्ता मध्यम श्रेणी में रही।
प्रतिकूल मौसमी दशाओं ने रोकी प्रदूषकों की निकासी
बारिश और तेज हवाएं प्रदूषक कणों को कम करने में मदद करती हैं, लेकिन मौसमी परिस्थितियां अनुकूल नहीं होने से इसका अपेक्षित असर नहीं दिखा। आईआईटीएम के मुताबिक, वेंटिलेशन इंडेक्स 3000 रहा, जो मानक से करीब 50 फीसदी कम है। इसके कारण प्रदूषक कण वातावरण से प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकल सके। पूर्वानुमान के अनुसार, 30 और 31 अक्तूबर को वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार हो सकता है, लेकिन एक नवंबर से हवा फिर खराब श्रेणी में पहुंचने की आशंका है।