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दबंगों को साथ लेकर चुनाव लड़ने में एतराज नहीं : राजपाल

Wed, 11 Jan 2017 03:33 PM IST
एसएस अवस्थी/अमर उजाला, नोएडा
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rajpal yadav - फोटो : अमर उजाला
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अभिनेता और मशहूर हास्य कलाकार राजपाल यादव का कहना है कि जब तक आपराधिक मामले में कोई दोषी सिद्ध न हो जाए तो उसे हम अपराधी कैसे कह सकते हैं। हमारी सर्व समभाव पार्टी को दबंगों के साथ चुनाव लड़ने में कोई एतराज नहीं है।
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चुनाव में हम 390 प्रत्याशी उतारेंगे। यदि जीत मिली तो ग्रामीण क्षेत्र का विकास सर्वोपरि रहेगा। मंगलवार को नोएडा ‘अमर उजाला’ दफ्तर पहुंचे राजपाल ने कहा कि उनके बड़े भाई व मुख्यमंत्री प्रत्याशी समाजसेवी श्रीपाल यादव के नाम से सर्व समभाव पार्टी का रजिस्ट्रेशन हो चुका है और शीघ्र ही चुनाव चिह्न भी मिल जाएगा।

15 जनवरी के बाद चुनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा कर देंगे। पार्टी विधानसभा चुनाव से शुरुआत करेगी और आगामी लोकसभा के चुनाव भी पूरे देश में लड़ेगी। पूरे यूपी का भ्रमण करने के बाद महसूस हुआ कि यहां विकास के साथ-साथ निर्माण की भी जरूरत है।
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हमारी पार्टी कोई आंदोलन नहीं चलाएगी

rajpal yadav - फोटो : अमर उजाला
​जातिवाद का कोई मोल नहीं होगा सिर्फ लोगों को जोड़ने का काम किया जाएगा। हमारी पार्टी कोई आंदोलन नहीं चलाएगी, लोगों के बीच संवाद करेगी। चुनाव में प्राथमिकताओं के बारे में उन्होंने कहा कि जब तक गांवों का विकास  नहीं होगा शहर का विकास संपूर्ण नहीं हो सकता।

खेतों में पक्की मेढ़ बंदी, रेलवे फाटकों पर एलिवेटेड रोड, गांवों से गांव को चौड़ी सड़क से जोड़ना, बंजर जमीन पर उद्योग समेत अन्य के लिए प्रयोग करना प्राथमिकता रहेगा।

जब स्मार्ट विलेज बनेंगे, तभी स्मार्ट सिटी होंगी। उन्होंने कहा कि हम गठबंधन की राजनीति में विश्वास नहीं करते। पार्टी के फंड के बारे में पूछे जाने पर कहा कि जब जन-बल होगा तो धन-बल की जरूरत ही नहीं होगी।
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राजनीति की डगर कठिन होती है

राजपाल यादव - फोटो : BBC
राजपाल ने कहा कि यूपी के शाहजहांपुर जिले के कुंडरा गांव में बचपन बीता है। गांव का जीवन कितना कठिन होता है, जानता हूं। 1988 में जब पहला नाटक ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ में भाग लिया तो लोगों ने तालियां बजाई थीं।


तभी से तय कर लिया था कि अभिनेता बनकर सबको हंसाता रहूंगा। उसी बीच राजनीति का भी चस्का लगा और चुनाव में एक प्रत्याशी के लिए प्रचार किया, लेकिन जीतने के बाद वे मुझे भूल गए। इसके बाद राजनीति में जरूर आने का फैसला कर लिया।


बड़े भाई श्रीपाल यादव ही पार्टी के मुखिया रहेंगे, मैं सिर्फ प्रचारक का काम करूंगा। 2004 और 2013 में विभिन्न राजनीति दलों ने चुनाव लड़ने के लिए कहा था, लेकिन मैं नहीं गया।
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