कांग्रेस ने दिल्ली में सभी सात लोकसभा सीटों पर पुराने चेहरों पर ही भरोसा जताया है। तीसरी सूची में दिल्ली की पश्चिम दिल्ली व दक्षिण दिल्ली के जिन दो सांसदों का टिकट रोका था उसे बृहस्पतिवार को जारी चौथी सूची में ओके कर दिया है।
दक्षिण दिल्ली से किसी दूसरे जाट या गुर्जर नेता की तलाश चल रही थी तो पश्चिम दिल्ली में किसी ग्लैमरस पूर्वांचली चेहरे की तलाश की बातें सामने आ रही थी। पश्चिम दिल्ली से सांसद महाबल मिश्रा तो दक्षिण दिल्ली से सांसद रमेश कुमार को ही कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी बनाया है।
बाकी पांच पूर्व सांसदों को पार्टी पहले ही टिकट थमा चुकी है। दिल्ली में नामांकन के लिए दो दिन और मतदान में अब बीस दिन बचे हैं। दोनों नेताओं के पास समय कम है। क्योंकि टिकट न मिलने की दुविधा के कारण काम शुरू नहीं कर सके हैं।
चर्चा में थे ये नाम लेकिन फिर लगा झटका
पश्चिम दिल्ली से सांसद महाबल मिश्रा तीन बार विधायक और एक बार पार्षद रहे हैं। 2009 में पहली बार संसद कांग्रेस की लहर में पश्चिम दिल्ली से जीतकर पहुंचे। जबकि दक्षिण दिल्ली से सांसद रमेश कुमार पूर्व सांसद व कांग्रेस के कद्दावर नेता सज्जन कुमार के भाई हैं।
जाट नेता रमेश कुमार 2009 के चुनाव में दक्षिण दिल्ली से सांसद बने। दोनों संसदीय सीट पर कांग्रेस का विधानसभा चुनाव में खाता नहीं खुल सका था। इसी का डर कांग्रेस को सता रहा है।
हालांकि दक्षिण दिल्ली से क्रिकेटर वीरेन्द्र सहवाग व एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रोहित चौधरी व गुर्जर नेता चतर सिंह का नाम चर्चा में रहा। वहीं पश्चिम दिल्ली में महाबल मिश्रा की जगह भी रोहित चौधरी के साथ पूर्वांचल को लुभाने वाले कलाकार शेखर सुमन, मनोज वाजपेयी और भोजपुरी अभिनेता कुणाल का नाम चर्चा में था।
अहम चुनाव में सातों सीटें गवां चुकी है कांग्रेस
1977 के लोकसभा चुनाव को कांग्रेस के पतन की शुरुआत माना जाता है। इस चुनाव के दौरान दिल्ली में कांग्रेस का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया था। यह पहला ऐसा चुनाव था जिसमें कांग्रेस का खाता नहीं खुल सका।
दरअसल 1975 कांग्रेस सरकार के इमरजेंसी लगाने के फैसले से लोगों में जबरदस्त गुस्सा था। इस चुनाव में करीब 70 प्रतिशत मतदान हुआ था। इससे पहले किसी भी लोकसभा चुनाव में इतना भारी मतदान नहीं हुआ था।
इस चुनाव से ही दिल्ली में बड़े नेताओं के मैदान में उतरने की शुरुआत हुई थी। नई दिल्ली से अटल बिहारी वाजपेयी ने चुनाव लड़ा था। छठे लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सभी उम्मीदवार चुनाव हार गए थे। उनमें छह सांसद शामिल थे। चार उम्मीदवार तो एक-एक लाख से अधिक अंतर से हारे थे।