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सीवेज प्लांटों की निगरानी में न हो लापरवाही : एनजीटी

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10 लाख रुपये पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की वसूली के निर्देश, बिना उपचार के पानी बहने और दुर्गंध व जहरीली गैसों से जुड़ी शिकायतें आई थीं सामने
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डीपीसीसी ने एनजीटी को बताया-कोंडली के चारों एसटीपी अप्रैल की जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए हैं

अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने न्यू कोंडली और मयूर विहार फेज-तीन के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की नियमित निगरानी के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि प्लांट लगातार पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप संचालित हों और आसपास रहने वाले लोगों को दुर्गंध या अन्य परेशानी न हो। यह आदेश एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने दिया।
मामले में कोंडली फेज-एक से चार तक के एसटीपी में मानकों के उल्लंघन, बिना उपचारित पानी के बहाव और दुर्गंध व जहरीली गैसों से संबंधित शिकायतें सामने आई थीं। हालांकि, दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने बताया कि अप्रैल में लिए गए नमूनों की जांच में चारों एसटीपी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाए गए।
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उल्लंघन पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति का प्रावधान
एनजीटी ने पिछले आदेश के तहत ‘प्रदूषण करने वाला भुगतान करेगा’ सिद्धांत के आधार पर दिल्ली जल बोर्ड और संबंधित कंपनी पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने का निर्देश दिया था। डीपीसीसी के अनुसार 10 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति लगाई जा चुकी है। पीठ ने कानूनी अड़चन न होने पर इसकी जल्द वसूली और उल्लंघन की आगे की अवधि की जांच के निर्देश दिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त क्षतिपूर्ति भी लगाई जाएगी।
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मच्छरों की रोकथाम के भी निर्देश
एनजीटी ने मच्छरों की रोकथाम के लिए एमसीडी की ओर से स्प्रे और फॉगिंग जारी रखने को कहा। भविष्य में उल्लंघन मिलने पर तत्काल सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश देते हुए पीठ ने मामले का निस्तारण कर दिया।
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