याची का कहना है कि उसने मातृत्व अवकाश प्राप्त करने के लिए चार जनवरी से डीयू को कई पत्र भेजे क्योंकि उसके बच्चे के जन्म की संभावित तिथि 22 फरवरी थी।
उसे डीयू ने कोई जवाब नहीं दिया। इस बीच तीन फरवरी को उसने बच्चे को जन्म दिया। तब से वह बिना वेतन छुट्टी पर है क्योंकि डीयू ने उसके मातृत्व अवकाश को स्वीकृति नहीं दी है।
दूसरी ओर, डीयू के अधिवक्ता ने कहा कि याची एक एडहॉक प्रोफेसर है और उसकी संविदा हर चार माह में रिन्यू की जाती है। उसकी संविदा 18 मार्च को समाप्त हो चुकी है। अपनी स्थायी कर्मचारियों को ही मातृत्व अवकाश देना डीयू का नीतिगत मामला है।