नाम बदलने कोई फायदा नहीं मिला, न तो सुविधाएं बढ़ीं और न ही किसी तरह की नई सुविधा का फायदा मिला। नाम भले ही दिव्यांग कर दिया लेकिन खुद की नजर में तो हम सभी विकलांग हैं। नाम में बहिष्कार का दिव्यांग विरोध करते हैं।
परीक्षा पास करने के बाद भी नियुक्तियां न होने से नाराज दिव्यांगों ने दिव्यांग शब्द पर सवाल उठाते हुए कहा कि हमारे किस अंग को दिव्य माना गया और अगर ऐसा है न्याय की गुहार लगाने पर कोई सुनवाई जरूर होती।
उन्होंने कहा कि दिव्यांगों के नाम पर ट्रेनों में अलग बोगी, रैंप की सुविधा, पेंशन और यूनीक आईडी का पूरे देश में फायदा मिलने की बात कही गई थी लेकिन इन सुविधाओं का फायदा लेने के रास्ते में कई अड़चनें हैं।
कई बुनियादी परेशानियों से अभी भी जूझ रहे दिव्यांगजन
रमण- नाम दिव्यांग किए जाने का कोई फायदा नहीं है, यह केवल दिखावा है। इसे विकलांग ही बना दिया जाना चाहिए। नाम बदलने से नहीं है कोई फायदा।
नीतिश- नाम बदलने से क्या फायदा, जब परेशानियां और बढ़ गई हैं। सरकार को पहले इसे दुरुस्त करना चाहिए।
जोगिंदर रावल- बसों में यात्रा के दौरान कई बार ऐसा बर्ताव किया जाता है कि दिव्यांग हीन भावना से ग्रस्त हो जाते हैं। बसों में सीट होने का कोई फायदा नहीं मिलता। ऐसे में दिव्यांग कहने की जरूरत नहीं। विकलांग ही बुलाया जाना चाहिए।
अन्नू कुमार- बसों में अब तक न तो दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा और न ही नियमित तौर पर पेंशन का भुगतान किया जाता है।
मुकेश कुमार राय- ट्रेनों में दिव्यांगों के लिए एक अलग बोगी का प्रावधान किया गया। अधिकतर नई ट्रेनों में यह सुविधा नहीं है। इतना ही नहीं, कई बार दिव्यांगों की सीटों पर किसी और का कब्जा होता है।
मुकेश कुमार- दिव्यांगों के लिए अभी भी कई जगहों पर रैंप की सुविधा नहीं है। चलने के दौरान कई बार दिक्कत आती है लेकिन किससे बताएं।
पुरु राय मोयल- दिव्यांगों के लिए यूनीक आईडी का प्रावधान किया गया है लेकिन आधार कार्ड की तरह इसका सभी प्रदेशों में फायदा नहीं मिलता है। इसके लिए पहले कई चक्कर लगाना होता है, फिर भी मुश्किलें बनी रहने की वजह से परेशानियां बरकरार हैं। अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस के मौके पर उन्होंने बहिष्कृत दिव्यांग शब्द के बदले दोबारा विकलांग शब्द को अपनाए जाने की मांग की।