दिल्ली के नेशनल हिस्ट्री म्यूजियम की तरह अगर साइबर सिटी के किसी मॉल आग लगी तो यहां बच निकलना मुश्किल होगा। म्यूजियम की तरह दुकानें खाक हो जाएंगी। कई मॉल में अग्रिशमन यंत्र के माकूल बंदोबस्त नहीं है। आग लगने की सूरत में निकलने के जो रास्ते हैं, सभी दरवाजे नीचे जाते हैं।
वहां पर अवरोधक होने की वजह बाहर निकलना आसान नहीं होगा। शहर के अधिकतर मॉल में आपात स्थिति में निकलने के लिए रास्ते ढूंढना ही मुश्किल है। मॉल में न तो फायर एग्जिट के सभी जगह निशान हैं और न ही मॉल का नक्शा है।
जिसे देखकर आपात स्थिति में आसानी से निकला जा सके। मॉल्स, उसके आपातकालीन रास्ते और आग से बचाव को लेकर किए इंतजाम पर अमर उजाला ने जायजा लिया। पेश है शाहनवाज आलम की लाइव रिपोर्ट:
एमजीएफ मेट्रोपॉलिटन मॉल
-शहर के भीड़ भाड़ वाले मॉल में से एक। पांच मंजिला मॉल। पांचवें तल पर एक तरफ लाइन से फास्ट फूड के स्टाल और खाने पीने के लिए दोपहर का समय। दूसरी तरफ पीवीआर सिनेमा। लोगों के आने जाने का सिलसिला जारी है।
पहले से लेकर पांचवीं मंजिल तक पर न तो आपात स्थिति में निकलने के दरवाजे का पता है और न ही रास्ते का। मॉल प्रबंधन की ओर से आपातकालीन स्थिति में निकलने के लिए जमीन पर हरे रंग से निशान बनाए हुए हैं, जो आकार में छोटे है और धीरे-धीरे मिट रहे हैं। कई जगहों पर मिट चुके हैं।
दीवारों पर इमरजेंसी एग्जिट के निशान नहीं हैं। जो इमरजेंसी एग्जिट है, वो सीधे बेसमेंट में जाता है या ग्राउंड फ्लोर के मुख्य द्वार पर। यहां से निकलना यानी आफत के समय में और आफत मोल लेने के बराबर है। पीछे के रास्ते पर भी सामान उतारे जा रहे हैं। गाडिय़ां खड़ी हैं।
सहारा मॉल, एमजी रोड
-शहर के मशहूर मॉल में से एक। पांच मंजिला मॉल में सबकुछ। हजारों की संख्या में लोग, लेकिन आपदा के समय निकलने के लिए रास्ते का सही प्रबंध नहीं। दीवारों पर लाल रंग से फायर एग्जिट लिखे हैं। दोनों ओर लाल रंग से इमरजेंसी के दरवाजे हैं, लेकिन छठे फ्लोर से दरवाजे पर निकलने के रास्ते बंद हैं।
पांचवें फ्लोर के बाद खुले हैं, जो सीधे बेसमेंट में ले जाता है। बाई तरफ की इमरजेंसी के दरवाजे ग्राउंड फ्लोर पर लाते हैं, लेकिन यहां सामान उतारने वाली गाडिय़ां खड़ी हैं। लोग भी यहां कार पार्क करके चले जाते हैं। यहां पर लगे अग्रिशमन यंत्र का माकूल इंतजाम नहीं है। जो हैं वह सभी छोटे हैं।
सिटी सेंटर मॉल
-सिनेमा हॉल, पऋब बार और कपड़ों के शोरूम से पटे इस मॉल में आपात रास्ते की सही जानकारी नहीं है। मॉल के दूसरे फ्लोर पर रास्ते घुमावदार है। यहां केवल उन जगहों पर एग्जिट के साइन बोर्ड लगाए गए हैं, जहां पर दरवाजे हैं। मॉल के दूसरे हिस्से से एग्जिट ढूंढना संभव नहीं है। पूछने पर एक गार्ड ने कहा इधर ही होगा।
ढूंढ लो। हर फ्लोर पर नक्शा है, लेकिन नक्शे से साफ है कि दो इमरजेंसी एग्जिट साथ है जबकि दो तरफ के लोगों को पूरब से पश्चिम की ओर निकलने के लिए जाना होगा। इमरजेंसी एग्जिट बाहर निकलता है, लेकिन यहां भी सामान चढ़ाया जा रहा है। यहां पर जो अग्रिशमन यंत्र लगे हुए हैं, उसमें कई एक्सपायर हो चुके हैं।
एमजीएफ मेट्रोपॉलिस मॉल
-अर्ध चक्र के रूप में बने इस मॉल में एक तरफ खाने पीने और बच्चों की मौज मस्ती का सामान है तो दूसरी तरफ दफ्तर हैं। मगर कहीं भी एग्जिट के लिए साइन बोर्ड नहीं है। पता ही नहीं किधर से निकला जाए। दूसरे फ्लोर पर एग्जिट दरवाजे के बाहर छोटा सा सीढिय़ों का निशान बना है।
मगर पूरे मॉल में इमरजेंसी एग्जिट लिखा साइन बोर्ड ढूंढना संभव नहीं है। शाम के समय पूरा मॉल फुल रहता है। अंदर जाकर दरवाजा मिलता है, जो नीचे ले जाता है। कहीं और रास्ता नहीं है। नीचे नहीं जाने पर मुख्य द्वार के जरिए बाहर निकलना होगा।