दिल्ली के राजघाट और बवाना बिजली उत्पादन संयंत्रों में सोमवार को बिजली उत्पादन ठप रहा। इन संयंत्रों में महज 500 से 600 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो पाया। यही नहीं, प्रगति पावर, ओखला, टीपीडीडीएल, दादरी और कुछ अन्य पावर प्लांटों में भी क्षमता से कम बिजली का उत्पादन हो रहा है।
आम दिनों में दिल्ली के संयंत्रों से 1000 से 1400 मेगावाट तक बिजली पैदा होती है। बवाना गैस पावर प्लांट में करीब 250 मेगावाट बिजली उत्पादन की क्षमता है, जबकि इस प्लांट से 100 से 150 मेगावाट बिजली का ही उत्पादन हो पाता है, लेकिन सोमवार को यह प्लांट पूरी तरह से ठप रहा।
इस प्लांट में गैस की सप्लाई नहीं होने से उत्पादन पर असर पड़ा है, जबकि राजघाट पावर प्लांट में तकनीकी खामियों की वजह से उत्पादन नहीं हो पा रहा। राजघाट पावर प्लांट की क्षमता 135 मेगावाट है। सोमवार को इस प्लांट से पूरी तरह से बिजली उत्पादन ठप रहा।
दिल्ली के इन पावर प्लांटों से उत्पादन ठप होने से बिजली वितरण कंपनियों को एनटीपीसी, डीवीसी व अन्य राज्यों की बिजली उत्पादन कंपनियों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। केंद्रीय अथवा दूसरे उत्पादन संयंत्रों से तय सीमा से ज्यादा बिजली लेने पर बिजली की कीमत भी अधिक चुकानी पड़ती है।
गर्मी बढ़ने से बिजली की मांग बढ़ी है, ऐसी स्थिति में तय सीमा से ज्यादा बिजली खरीद पर कंपनियों को अधिक कीमत चुकानी पड़ती है। हालांकि बिजली वितरण कंपनियों और ऊर्जा विभाग का कहना है कि कम बिजली उत्पादन की वजह से दिल्ली में बिजली की कोई लोड शेडिंग नहीं की जा रही है।