ग्रेटर नोएडा वेस्ट स्थित बहुमंजिला इमारतों में बन रहे एक लाख से ज्यादा आशियानों को रोशन करने की फिलहाल कोई तैयारी नहीं है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में इस नए शहर की आबादी को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
निवेशकों को लुभाने के लिए बिल्डर तरह-तरह के सब्जबाग दिखा रहे हैं, लेकिन सपनों के इस शहर में अपनी जमा पूंजी फंसाए बैठे हजारों निवेशक विकास की सुस्त रफ्तार से परेशान हैं।
तेजी से खड़ी हो रही इमारतों के लिए बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कोई प्लान नहीं बन सका है। एक अनुमान के मुताबिक ग्रेटर नोएडा वेस्ट को रोशन करने के लिए 600 से 700 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में बिजली सप्लाई का जिम्मा यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को मिलेगा या फिर नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) यह जिम्मेदारी अपने कंधों पर लेगी, इसको लेकर स्थित स्पष्ट नहीं है। बिजली सप्लाई का लाइसेंस हासिल करने के लिए दोनों कंपनियों के बीच खींचतान जारी है।
ऐसे बढ़ेगी डिमांड
करीब एक लाख फ्लैट ग्रेटर नोएडा वेस्ट में तैयार हो रहे हैं। अगर एक फ्लैट को पांच किलोवाट का कनेक्शन भी जारी किया गया तो सीधे-सीधे 500 मेगावाट बिजली का बंदोबस्त केवल फ्लैटों के लिए करना होगा।
इसके अलावा यहां कॉमर्शियल कांप्लेक्स आदि भी बनेंगे। वहीं, ग्रामीण क्षेत्राें को भी सप्लाई करनी होगी। ऐसे में 600 से 700 मेगावाट बिजली का इंतजाम इस नए शहर के लिए करना होगा।
कितने उपकेंद्र होंगे जरूरी
क्षमता संख्या
220 केवी 01
132 केवी 03
33/11 केवी 11
कोट-
ग्रेनो वेस्ट में बिजली सप्लाई की जिम्मेदारी जिस कंपनी को दी जाएगी वही यहां ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन का इंतजाम करेगी। फिलहाल मामला अदालत में विचाराधीन है, इसलिए कुछ कह पाना मुश्किल है।
-अरविंद राजवेदी, अधीक्षण अभियंता, विद्युत निगम