20 अक्तूबर को आगजनी की घटना में दो मासूमों की मौत से दुखी सुनपेड़ गांव में इस बार काली दिवाली रही। गांव में न तो आतिशबाजी हुई और न ही घर मोमबत्तियों और लड़ियों से रोशन हुए। त्योहार के नाम पर गांव के अधिकांश घरों में रस्म अदायगी हुई।
पांच अक्तूबर 2014 को एक मोबाइल के झगड़े में राजपूत और दलित परिवार एक-दूसरे के दुश्मन बन बैठे। इस मामले में दलित परिवार पर सवर्ण परिवार के तीन लोगों को मौत के घाट उतारने का आरोप है।
दलित परिवार के 11 लोग इस मामले में जेल में हैं। करीब एक साल बाद सुनपेड़ में फिर चर्चा में आ गया। 20 अक्तूबर की रात दलित परिवार के चार लोगों को जिंदा जलाने की कोशिश करने के आरोप में सवर्ण परिवार के सात लोग जेल में बंद हैं।
इस घटना में पीड़ित जितेंद्र के दो मासूम बच्चे अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि पत्नी अस्पताल में भर्ती है। इस घटना से गांव शोकग्रस्त है। इसका असर दिवाली के त्योहार पर भी दिखाई दिया।
इक्का-दुक्का घरों को छोड़ अधिकांश ग्रामीणों ने घरों को रोशन करने से भी परहेज किया। आतिशबाजी का शोर इस बार गांव में कहीं सुनाई नहीं दिया। ग्रामीणों का कहना था कि इस हत्याकांड से गांव की बदनामी हुई है।