हाईकोर्ट ने नाबालिग से रेप करने के बाद उससे विवाह करने के बावजूद साथ रखने से मना करने वाले आरोपी को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा यदि ऐसे व्यक्ति को जमानत दी गई तो वह पुन:जघन्य अपराध को दोहरा सकता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पवन कुमार मट्टू ने आरोपी द्वारा पेश उस तर्क को खारिज कर दिया कि पीड़िता की आयु 17 वर्ष है और उसके पिता ने लिखित में उसके साथ समझौता कर लिया है। अदालत ने यह कहा रेप समझौते के अपराधों की श्रेणी में नहीं आता, ऐसे में वह जमानत पाने का हकदार नहीं है।
अदालत ने पीड़िता के पिता की ओर से समझौते संबंधी पेश शपथपत्र को खारिज करते हुए कहा कि यह अपराध समझौते लायक नहीं है। यदि उसे जमानत दी गई तो वह अभियोजन पक्ष के सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने के अलावा फरार भी हो सकता है।