क्वारंटीन सेंटरों में रखे 916 तब्लीगी जमातियों की रिहाई के लिए दायर याचिका पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा। पुलिस ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान निजामुद्दीन मरकज में आयोजित हुई तब्लीगी जमात के सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामले में न कोई गिरफ्तारी है और ना किसी को हिरासत में लिया गया है। पीठ इस मामले में अगली सुनवाई बृहस्पतिवार को करेगी।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से सुनवाई की। पुलिस ने पीठ को बताया कि याचिकाकर्ताओं सहित तब्लीगी जमात के 900 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को जांच में शामिल किया गया है। नियमों का उल्लंघन करके एकत्रित होने के संबंध में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत उन्हें नोटिस भेजे गए हैं। वहीं, दिल्ली सरकार के स्थायी वकील राहुल मेहरा और अधिवक्ता चैतन्य गोसैन ने कहा कि जांच दिन-प्रतिदिन के आधार पर हो रही है और पुलिस एक हफ्ते के भीतर संबंधित निचली अदालत में इस मामले में आरोप पत्र दायर करेगी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश हुई अधिवक्ता रेबेका जॉन और वकील आशिमा मंडला ने अपील की है कि सभी विदेशी नागरिक जिनमें कोरोना संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है उन्हें क्वारंटीन सेंटरों से निकालकर अन्य जगह पर ठहराया जाए। वकीलों ने कहा कि वे ठहरने के वैकल्पिक स्थानों की सूची उपलब्ध कराएंगे और इन स्थानों पर ठहरने का खर्च समुदाय उठाएगा।
पीठ ने दिल्ली पुलिस और संबंधित एसडीएम द्वारा दायर दो स्थिति रिपोर्ट को भी रिकॉर्ड में रखा, जिसमें कहा गया कि राजस्व विभाग (दिल्ली) ने किसी भी विदेशी नागरिक को किसी तरह की हिरासत में नहीं रखा है, वह सिर्फ उनका ख्याल रख रहा है और उन्हें हरसंभव सुविधा दे रहा है। याचिका में कहा गया कि क्वारंटीन सेंटरों में रखे गए इन 916 विदेशी नागरिकों के कोविड-19 की जांच में संक्रमित नहीं पाए जाने के बावजूद इन्हें 30 मार्च से संस्थागत पृथक-वास केंद्र में रखा हुआ है। इन विदेशी नागरिकों में से 20 ने याचिकाएं दायर करके क्वारंटीन सेंटरों से छोड़ने की गुहार लगाई थी।