साइबर सिटी के पब-बार में इस्तेमाल होने वाले लिक्विड नाइट्रोजन की मॉनिटरिंग को लेकर पुख्ता बंदोबस्त नहीं है। प्रशासन की व्यवस्था इतनी लचर है कि कहां और कितनी मात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा है? इसकी जानकारी भी नहीं है।
वहीं दूसरी ओर इसका इस्तेमाल करने वाले लोग भी इतने जागरूक नहीं है कि लिक्विड नाइट्रोजन का शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है। न ही पब-बार में इसके जागरूकता के लिए कोई साइन बोर्ड या गाइडलाइन लगाई गई है।
दरअसल, गुरुग्राम के एक पब-बार में अधिक मात्रा में कॉकटेल के साथ लिक्विड नाइट्रोजन मिलाने के कारण एक व्यक्ति के पेट में सुराख हो गया था। जिसे बाद में पालम विहार स्थित कोलंबिया एशिया अस्पताल में इलाज कराया गया।
गनीमत रही उस व्यक्ति की जान बच गई, लेकिन इस घटना ने लिक्विड नाइट्रोजन के उपयोग, निगाहबानी और इस्तेमाल की मात्रा को लेकर सवाल खड़ा कर दिया है। इस मामले में निगाहबानी कौन विभाग करता है और किसे करना चाहिए? इससे संबंधित प्रशासन को भी सही जानकारी नहीं है।
आबकारी एवं काराधान विभाग लिक्विड नाइट्रोजन के खरीद फरोख्त की जानकारी तो रखता है, लेकिन कहां इस्तेमाल हो रहा है और किस जगह पर कितनी मात्रा में इस्तेमाल किया जाता है?
इसकी जानकारी न तो स्वास्थ्य विभाग के पास है और न ही स्वास्थ्य विभाग से संबंधित फूड एंड ड्रग विभाग को। समुचित निगाहबानी नहीं होने की वजह से खतरनाक लिक्विड नाइट्रोजन का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है, जिसका कभी भी गलत इस्तेमाल हो सकता है।
पब-बार में इस्तेमाल करने वाले है अनट्रेंड
-आमतौर पर नशा बढ़ाने और कॉकटेल या मॉकटेल से धुआं उठाने के लिए पब-बार में लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन प्रत्येक मिलीलीटर कॉकटेल या मॉकटेल में कितना प्रयोग करना है, इसका कोई मापदंड नहीं है।
एक पब के मैनेजर का कहना है क इसके लिए कोई दिशा निर्देश कभी किसी भी विभाग से नहीं दिया गया है। जब दिशा निर्देश ही नहीं तो मानक का सवाल ही नहीं उठता है। वेटर ग्राहक की मांग को ध्यान में रखकर अंदाज से लिक्विड नाइट्रोजन मिलाते हैं।