कॉर्बन मार्केट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के क्लाइमेट वीक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने बायोमास, जैव ईंधन, मेथनॉल और अपशिष्ट उपयोग पर सरकारी प्रयासों के अपने दृष्टिकोण को साझा किया।
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि हाइड्रोजन भविष्य का ईंधन है। हमारा सपना हाइड्रोजन ईंधन सि निर्यातक बनना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टिकाऊ विमानन ईंधन सबसे महत्वपूर्ण चीज है। वर्तमान में हम ऊर्जा के आयातक हैं और हमारा सपना ऊर्जा का निर्यातक बनना है।
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कॉर्बन मार्केट एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीएमएआई) के क्लाइमेट वीक में उन्होंने बायोमास, जैव ईंधन, मेथनॉल और अपशिष्ट उपयोग पर सरकारी प्रयासों के अपने दृष्टिकोण को साझा किया। दिल्ली के पांच सितारा होटल में आयोजित सीएमएआई के पांच दिवसीय क्लाइमेट वीक में अमर उजाला मीडिया पार्टनर की भूमिका निभा रहा है। मंगलवार को कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए।
उन्होंने कहा कि लोग शहरी क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी कृषि उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि भारत में फ्लेक्स इंजन वाहन आ रहे हैं और देश में इथेनॉल पंप खोले जा रहे हैं और इससे किसानों की आय बढ़ेगी। यह ऐसे क्षेत्र हैं जहां हम कृषि को सहायता दे सकते हैं। पहले हम किसानों को अन्नदाता कहते थे, लेकिन हमारी सरकार ने किसानों को ऊर्जादाता बना दिया है।
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इंडिया एसएएफ एलायंस का शुभारंभ किया
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंडिया एसएएफ एलायंस के नेतृत्व के साथ मिलकर क्लाइमेट वीक में आधिकारिक तौर पर इंडिया एसएएफ (सस्टेनेबल एवियेशन फ्यूल) एलायंस का शुभारंभ भी किया। सीएमएआई द्वारा शुरू किए गए इंडिया एसएएफ एलायंस का उद्देश्य पूरे देश में संधारणीय विमानन ईंधन को अपनाने में तेजी लाना और भारत के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सहयोगात्मक प्रयासों को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर इंडिया एसएएफ एलायंस के अध्यक्ष व जेडआर2 के संस्थापक जिमी ओल्सन ने कहा कि हमारे विजन के केंद्र में एसएएफ को संधारणीय और किफायती दोनों बनाने की आकांक्षा है। नवाचार और सहयोग को बढ़ावा देकर, हम भारत के लिए वैश्विक एसएएफ क्रांति का नेतृत्व करने की नींव रख रहे हैं। इंडिया एसएएफ एलायंस के सह-अध्यक्ष विजय निरानी ने यह पहल विमानन उत्सर्जन को कम करने के भारत के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण छलांग को दिखाती है।