निठारी केसः नौवें मामले में भी पंधेर और कोली को अदालत ने सुनाई फांसी की सजा
Fri, 08 Dec 2017 02:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
सार
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निठारी कांड: नौवें केस में भी कोली-पंधेर दोषी करार
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विशेष सीबीआई कोर्ट ने हत्या, रेप, और सबूत मिटाने का दोषी माना
प्वाइंटर
अदालत में आज होगी सजा पर बहस
अमर उजाला ब्यूरो
गाजियाबाद।
देश के बहुचर्चित निठारी कांड के नौवें केस में शुक्रवार (8 दिसंबर) को सीबीआई की विशेष अदालत ने अभियुक्त सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को हत्या, रेप, अपहरण और सबूत मिटाने का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई है। इसके साथ ही अदालत ने दोनों पर जुर्माना भी लगाया है।
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सीबीआई कोर्ट के विशेष न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की अदालत ने बृहस्पतिवार को करीब 15 मिनट की सुनवाई के बाद दोनों को दोषी करार दे दिया था। वहीं शुक्रवार को सजा पर बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने 1 बजे के बाद दोनों को फांसी की सजा सुना दी।
सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने बताया कि अदालत में निठारी कांड के नौवें मामले में (19 वर्षीय युवती की हत्या) में अभियुक्त सुरेंद्र कोली और कोठी डी-5 नोएडा सेक्टर 31 के मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर के मामले में फैसला सुनाया।
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आठ मामलों में पहले ही मिल चुकी है फांसी की सजा
nithari case
- फोटो : अमर उजाला
सुरेंद्र कोली को हत्या, अपहरण, रेप, और साक्ष्य मिटाने के लिए दोषी करार दिया गया। वहीं, पंधेर को हत्या, रेप में शामिल होने, सबूत मिटाने में सह अभियुक्त करार दिया गया।
कोर्ट ने कहा कि कोली के अपराध में पंधेर ने सहयोग किया, इसलिए वह भी उतना ही दोषी है, जितना कि कोली। शुक्रवार को अदालत में सजा पर बहस की जाएगी।
दोनों को डासना जेल भेज दिया गया। इससे पहले कोली को आठ मामलों में फांसी की सजा मिल चुकी है। वहीं, मोनिंदर सिंह पंधेर को निठारी के दो केसों में दोषी ठहराया जा चुका है।
यह था मामला
- फोटो : अमर उजाला
पश्चिम बंगाल निवासी 19 वर्षीय युवती अपने मामा के साथ निठारी में रहकर घरों में मेड का काम करती थी। 12 अक्तूबर 2006 को नोएडा सेक्टर 20 थाने में उसके मामा ने तहरीर दी थी कि भांजी काम से घर नहीं लौटी।
30 दिसंबर 2006 को रिपोर्ट दर्ज हुई। निठारी की डी-5 कोठी में खुदाई के दौरान युवती के कपड़े व चप्पल व बरामद हुए थे। मृतका के दांत से डीएनए लेकर मां के डीएनए से मिलाकर पहचान हुई। सीबीआई ने 11 जनवरी 2007 को मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
दो जुलाई 2007 को सीबीआई ने चार्जशीट पेश की थी। मुकदमे में कुल 346 दिन कार्रवाई चली। सीबीआई ने 38 गवाह पेश किए जबकि बचाव पक्ष ने महज एक गवाह मोनिंदर सिंह पंधेर की कंपनी में प्रबंधक विशाल वर्मा को पेश किया।
29 दिसंबर, 2006 : को पुलिस ने निठारी कांड का खुलासा करते हुए नोएडा के सेक्टर-31 की कोठी नंबर डी-5 से सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को गिरफ्तार किया था। तब पुलिस ने डी-5 कोठी के पास नाले से दर्जनों बच्चों के कंकाल बरामद किए थे।
10 जनवरी 2007 : को सभी मामले सीबीआई को सुपुर्द कर किया गया था। सीबीआई ने कुल 19 एफआईआर में से 16 में आरोप पत्र अदालत में पेश किए। 16 मामलों में से अब तक सुरेंद्र कोली को सात मामलों में हो चुकी है फांसी की सजा।
13 फरवरी, 2009 : पहले मामले में सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंधेर को फांसी की सजा सुनाई। 11 सितंबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंधेर को बरी कर दिया। जबकि सुरेंद्र कोली की सजा बरकरार रखी। सुप्रीम कोर्ट ने भी 7 जनवरी को सुरेंद्र कोली की सजा को बरकरार रखते हुए उसकी अपील को खारिज कर दिया।
12 मई, 2010 : दूसरे मामले में फांसी की सजा सुनाई।
28 सितंबर, 2010 : तीसरे मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
22 दिसंबर, 2010 : चौथे मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
24 दिसंबर, 2012 : पांचवें मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
7 अक्तूबर, 2016 : छठे मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।
16 दिसंबर, 2016 : सातवें मामले में कोली को फांसी की सजा सुनाई।