निर्भया के दोषियों की फांसी टलवाने के लिए जब उनके वकील ने देर रात में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो हमारी धड़कनें तेज हो गईं। हमें लगा कहीं फिर से फांसी न टल जाए, लेकिन फैसला उनकी बेटी के पक्ष में ही आया।
निर्भया के पिता बद्रीनाथ सिंह ने ये शब्द उस वक्त कहे, जब दोषियों की फांसी पर रोक की मांग वाली याचिका देर रात में हाईकोर्ट से और आधी रात के बाद सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो गई।
उन्होंने कहा कि पटियाला हाउस कोर्ट में दोषियों की फांसी पर रोक लगाने की याचिका खारिज होने पर निर्भया की मां और मैंने चैन की सांस ली, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि दोषी सजा को टलवाने के लिए रात में हाईकोर्ट और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। रात 9 बजे वे हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंचे और दोषियों के वकील एपी सिंह की दलीलों को निराधार बताते हुए पीठ ने याचिका खारिज कर दी।
इसके बाद जब दोषियों के वकील ने रात में ढाई बजे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो उनका डर और बढ़ गया, लेकिन वहां भी पीठ ने दोषियों की फांसी पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने पूर्ण रूप से राहत की सांस ली। इसके बाद उन्होंने तिहाड़ जेल पहुंचकर दोषियों की फांसी का इंतजार किया।
उन्होंने कहा कि मैं अपने एहसासों को बयां नहीं कर सकता कि मैं अब कैसा महसूस कर रहा हूं। मुझे अपनी बेटी की बहुत याद आ रही है। मैंने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए ईश्वर पर हमेशा भरोसा रखा और सुनवाई के दौरान यही प्रार्थना की कि दोषियों की फांसी पर अब रोक नहीं लगनी चाहिए।