‘जेल से सड़कों तक मुकेश टाइप लोग घूम रहे हैं। ऐसे घृणित अपराधियों का सच दुनिया के सामने आना जरूरी है। जब दुनिया भर में डाक्यूमेंट्री रिलीज हो गई तो अब भारत में न दिखाने का क्या फायदा? इसके प्रसारण से समाज की कुरीतियां ही सामने आएंगी।
हो सकता है प्रसारण के बाद लोग अपने बेटों को सभ्य नागरिक और महिलाओं की इज्जत करने की शिक्षा दे सकें। क्योंकि जेल से सड़कों तक न जाने कितने मुकेश बेटियों की आबरू तार-तार कर रहे हैं।’ यह कहना है बिटिया की मां का।
मां कहती है कि शनिवार को महिला दिवस मना रहे हैं, लेकिन फायदा ? क्योंकि जब तक हम अपनी बेटियों को सुरक्षा व सम्मान नहीं दे सकते हैं, तब तक कोई दिवस मनाकर उन्हें सम्मान देने कोई मायने नहीं रखता है।
विदेशी महिला को वृत्तचित्र बनाने की इजाजत ही नहीं मिलनी चाहिए थी, अब जब सब कुछ हो चुका है तो फिर इसे टीवी पर भी दिखा दें, ताकि बेटियों के परिजन समझ व देख सकें कि समाज में किस सोच के लोग हैं। बिटिया के परिजनों को यही मानना है।
बिटिया के पिता कहते हैं कि सरकार जो भी फैसला करेगी, हम उसका समर्थन करते हैं। क्योंकि पीड़िता हमारी बेटी के साथ-साथ भारत की नागरिक थी और उसके साथ हुए अन्याय पर दोषियों को सजा देना अब सरकार का कर्तव्य भी है।
वहीं, दोषी मुकेश भी नागरिक है और उसे सजा देना जरूरी काम है। हालांकि अब सरकार को फैसला करना है कि देश की बिटिया को सम्मान देते हुए गुनहगार को जल्द से जल्द फांसी की सजा दी जाए। अब सरकार को कार्रवाई करनी है।