ऐसे ही एक मामले में एक नाबालिग से सामूहिक दुष्कर्म एवं हत्या के मामले में मौत की सजा को इस कोर्ट ने एक पुनर्विचार फैसले में घटा कर 20 साल के सश्रम कारावास में तब्दील कर दिया। यह इस आधार पर किया गया कि दोषी की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और उसके सुधार की अब भी गुंजाइश है।
याचिका में जस्टिस जेएस वर्मा कमेटी की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि समिति ने दुष्कर्म एवं हत्या के अपराधों के लिए मौत की सजा के खिलाफ पैरोकारी की है।
किस दोषी के पास अब क्या विकल्प
-मुकेश सिंह: अब कोई विकल्प नहीं
-पवन गुप्ता: सुधारात्मक और दया याचिका दोनों विकल्प बाकी
-अक्षय ठाकुर: सुधारात्मक याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, दया याचिका अभी बाकी
-विनय शर्मा: सुधारात्मक याचिका खारिज, दया याचिका राष्ट्रपति को भेजी