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Nirbhaya Case: डेथ वारंट जारी, 22 जनवरी को सुबह सात बजे होगी चारों दोषियों को फांसी

Wed, 08 Jan 2020 02:40 AM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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निर्भया के दोषी - फोटो : अमर उजाला
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बीते सात सालों से पूरा देश निर्भया के दोषियों को फांसी का इंतजार कर रहा था और आज अदालत ने वो फैसला सुना ही दिया। दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों का डेथ वारंट जारी करते 22 जनवरी को फांसी की तारीख तय की है।

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निर्भया के चारों दोषियों अक्षय, विनय, मुकेश और पवन को 22 जनवरी की सुबह 7 बजे जेल नंबर में तीन फांसी होगी। इस दौरान अदालत ने दोषियों के हक का खयाल रखते हुए उन्हें क्यूरेटिव पिटिशन दायर करने के लिए 14 दिन का समय दिया है। इस बीच दोषी क्यूरेटिव पिटीशन दायर कर सकते हैं।


अदालत का फैसला आने के बाद दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन दायर करेंगे। वहीं निर्भया की मां आशा देवी अदालत के फैसले से बहुत खुश हैं।

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आशा देवी ने कहा कि मेरी बेटी को आज न्याय मिल गया। चारों दोषियों को फांसी मिलने से देश में महिलाएं सशक्त होंगी। इस फैसले से लोगों का न्याय पर भरोसा कायम होगा।

वहीं तिहाड़ जेल की तरफ से कहा गया है कि हम मेरठ के एक जल्लाद की मदद लेंगे। कहा कि चारों दोषियों को फांसी देने के लिए हमारे पास उचित व्यवस्था है।   

 

वकीलों ने दी ये दलीलें

सुनवाई के दौरान सरकारी वकील ने अदालत से डेथ वारंट जारी करने की अपील की थी। वहीं दोषियों के वकील ने अदालत को बताया है कि वह क्यूरेटिव याचिका दायर करने की प्रक्रिया को पूरा करने में लगे हुए हैं। वकील राजीव मोहन की ओर से अदालत में कहा गया है कि ट्रायल कोर्ट की ओर से उन्हें दोषी करार दिया जा चुका है। उन्होंने ये भी जानकारी दी कि वर्तमान समय में कोई भी दया याचिका लंबित नहीं है। 

इस पर दोषियों के वकील एपी सिंह ने कहा कि उनके वकील पूरी रिपोर्ट कर रहे हैं, हमें भी इसकी कॉपी देनी चाहिए। वकील राजीव मोहन ने कहा कि डेथ वारंट से मामला खत्म नहीं होता, वारंट से फांसी के बीच दया याचिका दायर की जा सकती है। नियमों के अनुसार दोषी को 14 दिन का वक्त मिलना चाहिए। 

जेल प्रशासन ने दी जानकारी

वहीं इस संबंध में जेल प्रशासन का कहना है कि तीन दोषियों विनय, पवन और अक्षय ने एक सप्ताह के भीतर ही जेल प्रशासन को अपना जवाब भेज दिया था। उन्होंने दया याचिका से पहले क्यूरेटिव याचिका लगाने का विकल्प होने की बात कही थी।

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