लोगों की भावनाओं को देख फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन हुआ और इस मामले की सुनवाई साकेत कोर्ट में प्रतिदिन चली। ट्रायल कोर्ट ने 9 महीने में 80 से ज्यादा गवाहों, 130 सुनवाई के बाद 13 सितंबर 2013 को विनय शर्मा, अक्षय ठाकुर, मुकेश व पवन को फांसी की सजा सुना दी। पांचवें आरोपी राम सिंह ने 11 मार्च 2013 को तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर ली थी। फांसी की सजा की पुष्टि के लिए फाइल हाईकोर्ट में पहुंची। हाईकोर्ट ने तुरंत संज्ञान लेकर 23 सितंबर को ही दोषियों से जवाब तलब कर लिया। दिन-प्रतिदिन आधार पर सुनवाई कर हाईकोर्ट ने मात्र छह माह में अपील का निपटारा कर ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट ने अपना फैसला 13 मार्च 2014 को दिया। दोषी मुकेश व पवन ने 15 मार्च 2014 को सर्वोच्च न्यायालय में हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी। दोषी विनय व अक्षय ठाकुर ने जुलाई माह में अपील दायर की। सर्वोच्च न्यायालय ने उनकी अपील को स्वीकार करते हुए फांसी की सजा पर रोक लगा दी। सर्वोच्च न्यायालय में करीब दो वर्ष तो सुनवाई ही शुरू नहीं हुई। सर्वोच्च न्यायलय में 4 अप्रैल 2016 को सुनवाई शुरू हुई। 28 अप्रैल को सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय खंडपीठ का गठन हुआ। नियमित सुनवाई जनवरी 2017 से शुरू हुई। सर्वोच्च न्यायालय ने 5 मई 2017 को दोषियों की फांसी की सजा को बरकरार रखा। इसके बाद उन्होंने पुनर्विचार याचिका दायर की। 9 जुलाई को वह भी खारिज हो गई।
कब क्या हुआ
- 16 दिसंबर-2012 : वसंत विहार में रात साढ़े 9 बजे चार्टर्ड बस में निर्भया से सामूहिक दुष्कर्म के बाद दरिंदगी। उसके दोस्त की पिटाई।
- 17 दिसंबर : पुलिस ने सामूहिक दुष्कर्म का मामला दर्ज किया। मुख्य आरोपी राम सिंह गिरफ्तार।
- 18 दिसंबर 2012: राजधानी में सामूहिक दुष्कर्म के विरोध में प्रदर्शन शुरू।
- 19 दिसंबर : सामूहिक दुष्कर्म के तीन अन्य आरोपी विनय, पवन और मुकेश गिरफ्तार। अदालत में विनय और पवन ने अपनी गलती स्वीकार की। विनय ने अपने लिए फांसी की सजा की मांग की। दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस से मामले की रिपोर्ट मांगी।
- 21 दिसंबर 2012 : सामूहिक दुष्कर्म के पांचवें आरोपी ने कहा कि वह नाबालिग है। उसकी उम्र साढ़े सत्रह वर्ष है। उसे आनंद विहार बस अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। इसी दिन एक अन्य आरोपी अक्षय कुमार उर्फ ठाकुर को औरंगाबाद बिहार से गिरफ्तार किया गया।
- 22 दिसंबर 2012 : पीड़िता ने एसडीएम के सामने अस्पताल में बयान दर्ज कराए।
- 23 दिसंबर 2012 : दिल्ली हाईकोर्ट ने तेजी से सुनवाई के लिए स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया।
- 24 दिसंबर 2012 : पूरे देश में विरोध प्रदर्शन का सिलसिला जारी रहने के दौरान सरकार ने ऐसे मामलों में तेजी से सुनवाई और कानून बनाने के लिए एक कमेटी का गठन किया।
- 26 दिसंबर : निर्भया की हालत बिगड़ी और उसे एयर एंबुलेंस के जरिये सिंगापुर स्थित माउंट एलिजाबेथ अस्पताल भेजा गया।
- 29 दिसंबर : सुबह दो बजकर 15 मिनट पर सिंगापुर में निर्भया की मौत।
- 28 जनवरी 2013 : आरोपियों में से एक को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग घोषित किया।
- 3 जनवरी : पुलिस ने साकेत कोर्ट में पांच आरोपियों के खिलाफ दाखिल की चार्जशीट।
- 2 फरवरी 2013 : फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच लोगों पर हत्या, गैंगरेप मामलों में आरोप तय किए।
- 11 मार्च 2013 : गैंगरेप के आरोपियों में से एक राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर जान दी।
- 11 जुलाई 2013 : जेजेबी ने नाबालिग को लूटपाट मामले में दोषी ठहराया।
- 31 अगस्त 2013 : नाबालिग को गैंगरेप और हत्या में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई।
- 13 सितंबर 2013 : ट्रायल कोर्ट ने आरोपी पवन, अक्षय, मुकेश व विनय को फांसी की सजा सुनाई। फाइल हाईकोर्ट भेजी।
- 13 मार्च 2014 : हाईकोर्ट ने दोषियों को सुनाई फांसी की सजा को बरकरार रखा।
- 15 मार्च 2014 : मुकेश व पवन ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दाखिल की।
- जुलाई 2014 : अन्य दोषियों ने भी अपील दायर की।
- 4 अप्रैल 2016 : सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई शुरू की।
- 28 अप्रैल 2016 : सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए तीन सदस्यीय खंडपीठ का गठन किया।
- जनवरी 2017 : नियमित सुनवाई आरंभ।
- 27 मार्च 2017 : सर्वोच्च न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा।
- 5 मई 2017 : दोषियों की फांसी की सजा पर मुहर।
- तीन दोषियों की पुनर्विचार याचिका।
- 5 मई 2019 फैसला सुरक्षित।
- 9 जुलाई को पुनर्विचार याचिका खारिज।
- फिलहाल क्यूरेटिव याचिका लंबित