हाईकोर्ट ने 54 करोड़ रुपये का मुआवजा देने के आदेश के खिलाफ राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) की अपील खारिज कर दी है। आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल ने एनएचएआई को देरी का दोषी मानते हुए पीएनसी इंफ्राटेक को 54 करोड़ का मुआवजा देने का निर्देश सितंबर 2018 में दिया था। यह मामला यूपी में गढ़मुक्तेश्वर से मुरादाबाद के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग के चौड़ीकरण और आरओबी निर्माण में देरी से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने अपील खारिज करते हुए कहा कि एनएचएआई की याचिका में कोई दम नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर भी गौर किया कि एनएचएआई मुआवजे की राशि कोर्ट में जमा करा चुकी है। कोर्ट ने यह राशि आठ सप्ताह बाद ब्याज समेत पीएनसी को देने का निर्देश दिया है।
एनएचएआई ने पीएनसी इंफ्राटेक तथा भागीरथ इंजीनियरिंग लिमिटेड (बीईएल) के साथ फरवरी 2005 में राजमार्ग चौड़ीकरण और रेल ओवरब्रिज (आरओबी) के निर्माण के लिए समझौता किया था। इस निर्माण की लागत 221.42 करोड़ रुपये थी। इस कार्य की शुरुआत 31 मार्च 2005 से होनी थी और 30 सितंबर 2007 को यह पूरा होना था।
बीईएल बाद में इस प्रोजेक्ट से अलग हो गई थी। राजमार्ग चौड़ीकरण का कार्य 22 महीने की देरी के बाद जुलाई 2009 में तथा आरओबी का कार्य 45 महीने की देरी के बाद पूरा हुआ था। इस देरी के लिए ट्रिब्यूनल ने एनएचएआई को जिम्मेदार माना था।