-समिति ने दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को गंभीर समस्या बताया
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने 2023 की दिल्ली बाढ़ से जुड़े मामले में प्रगति की समीक्षा करते हुए संबंधित एजेंसियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। अध्यक्षता न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद ने की। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट का अवलोकन किया गया, जिसमें संयुक्त बाढ़ प्रबंधन समिति के निष्कर्ष शामिल थे। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023 की बाढ़ असामान्य वर्षा के कारण गंभीर हुई, जो 1978 की तुलना में 23.8 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। साथ ही निली छतरी जैसे क्षेत्रों को अत्यधिक संवेदनशील पाया गया। समिति ने दिल्ली-एनसीआर में विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी और यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र में बढ़ते अतिक्रमण को गंभीर समस्या बताया।
पीठ को अवगत कराया गया कि संवेदनशील इलाकों में रिटेनिंग वॉल निर्माण जैसे अल्पकालिक उपाय लागू किए गए हैं, जबकि सीडब्ल्यूपीआरएस पुणे द्वारा यमुना नदी पर एक वैज्ञानिक अध्ययन 31 अगस्त 2026 तक पूरा किया जाएगा। इसके अलावा मानसून 2026 से पहले नालों की व्यापक सफाई और विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए समितियों का गठन किया गया है। अधिकरण ने सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग को अगली सुनवाई से कम से कम एक सप्ताह पूर्व प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभागों और अपर यमुना नदी बोर्ड को भी मामले में पक्षकार बनाया गया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को होगी।