नई दिल्ली। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में अवैध रूप से पेड़ काटने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) को करीब 2.65 करोड़ रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति करने की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं। अधिकरण ने माना था कि बीएचयू परिसर में 33 पेड़ अवैध तरीके से काटे गए थे। इसके बदले विश्वविद्यालय को हर एक पेड़ के स्थान पर 20 पौधे (कुल 660 पौधे) लगाने के निर्देश दिए गए थे। वन विभाग की संयुक्त समिति के अनुसार, बीएचयू ने 978 पौधे लगाए, जिनमें से 859 पौधे जीवित पाए गए। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने एनजीटी को बताया कि 33 पेड़ों की अवैध कटाई के लिए 2,65,26,877 (करीब 2.65 करोड़ रुपये) की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति का आकलन कर लिया गया है, हालांकि, बोर्ड तय समय के भीतर कार्रवाई पूरी नहीं कर सका। इस पर एनजीटी ने उसे अतिरिक्त समय देते हुए पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति लगाने की पूरी प्रक्रिया जल्द़ पूरी करने के निर्देश दिए हैं। ब्यूरो