सरोजनी नगर में प्रदर्शन कर रहे लोग
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प्रधान पीठ ने कहा कि एनजीटी में दाखिल की गई याचिकाओं में यह आरोप है कि दक्षिणी दिल्ली की सात कालोनियों के पुर्नविकास में करीब 17 हजार पेड़ों की कटाई की जाएगी।
इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा बल्कि दिल्ली के लिए यह त्रासदी साबित होगी। पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टि से यह कहा जा सकता है कि बिना आंकलन यदि इस तरह से परियोजना को चलने दिया गया तो इसका पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
17 हजार पेड़ों की संख्या मिथक
एनबीसीसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पिनाकी मिश्रा ने कहा कि प़रियोजना में काटे जाने वाले पेड़ों की जो भी संख्या बताई जा रही है वह एक मिथक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परियोजना प्रस्तावक खुद अगली सुनवाई तक पेड़ों की कटाई नहीं करेगा। पीठ ने मामले में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भी पक्षकार के तौर पर जोड़कर उनसे भी जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।