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दिल्ली: 19 जुलाई तक पेड़ों की कटाई पर एनजीटी की रोक, एनबीसीसी से पूछा-पेड़ों के कटाई की सही संख्या

Tue, 03 Jul 2018 11:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल (एनजीटी) ने दक्षिणी दिल्ली में सात कालोनियों के पुर्नविकास मामले में 19 जुलाई तक पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। एनजीटी ने दिल्ली उच्च न्यायालय के हालिया आदेश पर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और परियोजना प्रस्तावक राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।

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पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा है कि प्रथम दृष्टि में यह सही है कि बिना परियोजना के आंकलन किए काम होने से दिल्ली के पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर बेहद प्रतिकूल असर पड़ेगा।  

जस्टिस जवाद रहीम की अध्यक्षता वाली पीठ ने सोमवार को तीन अलग-अलग याचिकाओं पर गौर करने के बाद मामले में केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय, परियोजना प्रस्तावक राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी), दिल्ली सरकार, दिल्ली जल बोर्ड, नई दिल्ली नगर पालिका, दक्षिणी दिल्ली नगर निगम, दिल्ली विकास प्राधिकरण व दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड व अन्य पक्षकारों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई तक जवाब देने को कहा है।
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एनबीसीसी से पूछा-पेड़ों के कटाई की वास्तविक संख्या 
एनजीटी की प्रधान पीठ ने गैर सरकारी संस्था चेतना, ग्रीन सर्कल व याची उत्कर्ष बंसल की याचिकाओं पर गौर करने के बाद यह आदेश दिया है। पीठ ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय और परियोजना प्रस्तावक एनबीसीसी 19 जुलाई तक एक चार्ट बनाकर पेड़ों की कटाई की वास्तविक संख्या पेश करें। मामले में गैर सरकारी संस्था चेतना की ओर से याची अनिल सूद और ग्रीन सर्कल के सचिव वी सेल्वाराजन पेश हुए।

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बिना किसी आंकलन के नुकसानदेह है परियोजना

सरोजनी नगर में प्रदर्शन कर रहे लोग - फोटो : अमर उजाला
प्रधान पीठ ने कहा कि एनजीटी में दाखिल की गई याचिकाओं में यह आरोप है कि दक्षिणी दिल्ली की सात कालोनियों के पुर्नविकास में करीब 17 हजार पेड़ों की कटाई की जाएगी।

इससे न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान होगा बल्कि दिल्ली के लिए यह त्रासदी साबित होगी। पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टि से यह कहा जा सकता है कि बिना आंकलन यदि इस तरह से परियोजना को चलने दिया गया तो इसका पर्यावरण और पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।

17 हजार पेड़ों की संख्या मिथक  
एनबीसीसी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पिनाकी मिश्रा ने कहा कि प़रियोजना में काटे जाने वाले पेड़ों की जो भी संख्या बताई जा रही है वह एक मिथक है। उन्होंने आश्वासन दिया कि परियोजना प्रस्तावक खुद अगली सुनवाई तक पेड़ों की कटाई नहीं करेगा। पीठ ने मामले में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भी पक्षकार के तौर पर जोड़कर उनसे भी जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले पर अगली सुनवाई 19 जुलाई को होगी।
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