नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हाल ही में केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से पहली बार जारी की गई भू-जल दोहन रोकथाम संबंधी गाइडलाइन में खामियों के लिए कड़ी फटकार लगाई है। प्रधान पीठ ने कहा कि यह गाइडलाइन स्पष्ट तौर पर राष्ट्रीय हित के विरुद्ध है।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह आदेश दिया है। याची विक्रांत तोंगड़ के मामले में एनजीटी ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय को आदेश दिया था कि वह 18 दिसंबर से पहले देश में अवैध भू-जल दोहन की रोकथाम और नियमन के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करे। इसके बाद मंत्रालय की ओर से हाल ही में विस्तृत गाइडलाइन जारी की गई थी।
जल संसाधन मंत्रालय की ओर से पीठ को बताया गया कि संशोधित गाइडलाइन में जल संरक्षण शुल्क का प्रावधान भी पहली बार किया गया है। इस पर पीठ ने कहा कि सिर्फ जल संरक्षण शुल्क जैसे प्रावधान भू-जल दोहन को कम करने या रोकने के लिए नाकाफी हैं। एनजीटी ने जारी की गई गाइडलाइन पर याची से भी अपनी आपत्ति और सुझाव ट्रिब्यूनल में दाखिल करने को कहा है।
पीठ ने कहा कि याची 2 जनवरी तक इस अधिसूचना परर अपने सुझाव और आपत्ति को दाखिल करे। पीठ ने कहा कि भू-जल दोहन मामले पर 11 जनवरी को ट्रिब्यूनल का विस्तृत आदेश जारी किया जाएगा।
केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय की ओर से जारी की गई अधिसूचना में कृषि क्षेत्र को अनापत्ति प्रमाण पत्र से बाहर रखा गया था साथ ही बोतलबंद और पानी बिक्री करने वाली औद्योगिक ईकाइयों को सरकार के पास अनापत्ति प्रमाण पत्र हासिल करने के लिए आवेदन करने को भी कहा गया था।