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10 साल पुराने डीजल वाहनों पर दिल्ली-NCR में रोक, NGT का फैसला

Fri, 15 Sep 2017 09:51 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर अपना फैसला सुनाया
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राष्ट्रीय राजधानी में दस साल से अधिक पुराने डीजल वाहनों के भविष्य का अंतिम फैसला सुनाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने बृहस्पतिवार को इस प्रत‌िबंध को बरकरार रखा है।
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गौरतलब है क‌ि 2014 से लंबित इस मामले पर केंद्र सरकार जहां उम्र सीमा के आधार पर डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने के आदेश के खिलाफ रही है वहीं दूसरी तरफ एनजीटी उम्र सीमा के आधार पर पुराने डीजल वाहनों पर प्रतिबंध को जायज ठहराती रही है। पीठ ने इस चर्चित मसले पर अप्रैल में अपना फैसला सुरक्षित किया था। अब मौजूद तथ्यों, दलीलों और आंकड़ों के आधार पर विस्तृत फैसला सुनाया।

जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ इस मामले पर अपना फैसला सुनाया। इस पीठ में जस्टिस जावद रहीम, जस्टिस रघुवेंद्र एस राठौर के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये एक्सपर्ट मेंबर बिक्रम सिंह भी शामिल हुए।
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पुराने डीजल वाहनों को लेकर चुनौती
एनजीटी दस वर्ष से अधिक पुराने डीजल वाहनों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर उन राज्यों और जिलों में भेजने का भी पूर्व में आदेश दे चुका है जहां गाड़ियों की संख्या का घनत्व बेहद कम और प्रदूषण भी कम है। फिलहाल कुछ राज्यों की ओर से यह सूची एनजीटी में दाखिल की जा चुकी है। चुनौती यह है कि ऐसे जिलों में पुराने वाहन के खरीदार कब मौजूद होंगे और फिर जमीन की उपलब्धता का अभाव झेल रही दिल्ली में पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए कहां रखा जाएगा।

अधर में है प्रोत्साहन देने वाली केंद्र की स्क्रैप नीति
वहीं एनजीटी केंद्र को पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए जल्द से जल्द नीति तय करने के लिए भी आदेश दिया है। बहरहाल वाहनों की स्क्रैप नीति अभी केंद्रीय वित्त मंत्रालय के कारण अधर में फंसी है। इस नीति के तहत वाहन मालिक को अपने पुराने वाहन को स्क्रैप करने के लिए प्रोत्साहन राशि दी जानी है।

पुराने डीजल वाहनों से प्रदूषण पर भी सवाल का मुद्दा
आईआईटी की रिपोर्ट से ही यह बात साफ हुई थी कि डीजल वाहनों से वातावरण ज्यादा प्रदूषित होता है जबकि केंद्र सरकार अपने हलफनामे में यह कहता रहा है कि डीजल वाहनों से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी बेहद कम है। हालांकि एनजीटी ने स्पष्ट किया था कि डीजल वाहन प्रदूषण के लिए प्रबल जिम्मेदार हैं।
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