नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने मंगलवार को दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के मुख्य सचिवों के कार्यालय में विशेष इकाइयां बनाने का निर्देश दिया। इस इकाई का काम अगले एक महीने रोजाना पराली जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण की समस्या पर नजर रखना होगा।
एनजीटी ने केंद्र में कृषि मंत्रालय के संबंधित संयुक्त सचिव और पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कृषि सचिवों को 15 अक्तूबर को स्थिति रिपोर्ट के साथ पेश होने को कहा।
एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण की समस्या से प्रभावी कदम उठाये बिना नहीं निपटा जा सकता। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यों को हालात की समीक्षा के लिए जिला स्तर पर भी ऐसे प्रकोष्ठ बनाने चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘हमारा विचार है कि प्रभावी पर्यावरण प्रशासन के माध्यम से इस विषय से निपटना जरूरी है जो राज्य का अपरिहार्य कर्तव्य है। निसंदेह केंद्र सरकार ने इस मकसद से धन दिया है लेकिन केंद्र को हालात पर निगरानी के लिए इस्तेमाल में लाए जाने वाली प्रभावी रणनीतियों के लिए और दिशानिर्देश देने चाहिए।
मुख्य सचिव के कार्यालय में एक विशेष प्रकोष्ठ बनाया जा सकता है ताकि कम से कम अगले एक महीने के लिए रोजाना आधार पर हालात की समीक्षा हो सके। इसी तरह से जिलाधिकारियों या अन्य किसी अधिकारी के दफ्तर में भी विशेष प्रकोष्ठ बनाए जा सकते हैं।
एनजीटी ने कहा कि इस तरह की निगरानी प्रणाली को सात अक्तूबर तक अंतिम रूप दिया जा सकता है और राज्य की वेबसाइट पर इसे डाला जा सकता है जिससे जन सहभागिता और जागरूकता बढ़ सकती है। सभी स्तरों पर गंभीर प्रयासों से समस्या को नियंत्रण किया जा सकेगा।
मालूम हो कि इससे पहले ही एनजीटी कृषि मंत्रालय को निर्देश दे चुकी है कि वह रिपोर्ट दाखिल कर बताएं पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए उसने क्या कदम उठाए हैं।