वायु प्रदूषण की हालत देखते हुए 7 नवंबर से 30 नवंबर तक पटाखों पर प्रतिबंध लगाने की मांग पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सोमवार को केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
एनजीटी ने पूछा है कि क्या लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के हित को देखते हुए पटाखों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। इस बीच 14 नवंबर को दिवाली और 20 नवंबर को छठ पर्व है जिस दौरान पटाखे चलाए जाते हैं।
एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस एके गोयल की पीठ ने केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, दिल्ली पुलिस उपायुक्त के अलावा दिल्ली, हरियाणा, यूपी और राजस्थान सरकार को नोटिस जारी किया है। साथ ही एनजीटी ने वरिष्ठ अधिवक्ता राज पंजवानी और वकील शिबानी घोष को इस मामले में न्यायमित्र नियुक्त किया है।
एनजीटी इंडियन सोसायटी सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी नेटवर्क की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में एनसीआर में पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई थी। याचिका में दलील दी कि कोरोना महामारी के दौर में बेहद खराब वायु गुणवत्ता के कारण पटाखों पर रोक की मांग की गई थी।
याचिका में स्वास्थ्य मंत्रालय के बयान का भी हवाला
याचिका में स्वास्थ्य मंत्रालय के उस बयान का हवाला दिया गया जिसमें स्वास्थ्य मंत्री ने कहा था कि दिवाली के दौरान दिल्ली-एनसीआर में कोरोना के मामले बढ़ेंगे। मंत्रालय ने कहा था कि इस दौरान दिल्ली में दैनिक मामले मौजूदा 5000 की दर से बढ़कर 15,000 हो सकते हैं।
ग्रीन पटाखे भी समाधान नहीं
याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मौजूदा स्थिति में ग्रीन पटाखे भी समाधान नहीं हो सकते। इनसे निकलने वाला धुआं भी घुटन का कारण बन सकता है और इससे गैस चैंबर जैसी स्थिति बन सकती है। यदि ऐसा हुआ तो दृश्यता कम होने के साथ साथ लोगों का दम घुटने जैसी स्थिति होने की भी संभावना है।
राजस्थान ने लगाई पटाखा बिक्री पर रोक
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी। सीएम ने कहा, कोविड मरीजों की राहत और लोगों को प्रदूषण के दुष्प्रभावों से बचाने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। साथ ही बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के वाहनों की आवाजाही पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।