-आवेदक ने शिकायत में बताया कि कूड़ा घर में बच्चों से कचरे की छंटाई कराई जा रही
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित पॉश कॉलोनी राजौरी गार्डन से जुड़ा एक गंभीर पर्यावरणीय मामला सामने आया है, जिसने न केवल स्थानीय निवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक सार्वजनिक पार्क को कथित तौर पर अवैध रूप से कूड़ा संग्रह केंद्र में तब्दील करने के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की प्रधान पीठ ने संज्ञान लेते हुए नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) को नोटिस जारी किया है। अधिकरण ने निगम को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने और तत्काल अंतरिम सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी 2026 को है।
मामले में आवेदक संजीव नैयर ने आरोप लगाया कि हरभगवान अरोड़ा मार्ग स्थित पार्क की स्वीकृत लेआउट प्लान के अनुसार निर्धारित भूमि पर अवैध रूप से कूड़ा घर बना है। इससे न केवल पार्क का उद्देश्य प्रभावित हो रहा, बल्कि आसपास के निवासियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा। आवेदक ने शिकायत में बताया कि कूड़ा घर में बच्चों से कचरे की छंटाई कराई जा रही है, जो बाल श्रम और पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। इसके अलावा, कचरा एकत्र करने वाले रिक्शा सड़क पर अतिक्रमण कर रहे हैं, जिससे यातायात बाधित हो रहा है। सबसे बड़ी समस्या दुर्गंध की है, जो आसपास के घरों तक फैल रही है और निवासियों, खासकर आवेदक के स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रही है।एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल शामिल हैं ने इसे पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन का गंभीर मामला माना। अधिकरण ने कहा कि यह ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों और पार्कों की रक्षा से जुड़ा मुद्दा है। एमसीडी को निर्देश दिया गया कि वह अगली सुनवाई से पहले अंतरिम राहत के उपाय अपनाए और उनका विवरण जवाब में शामिल करें।