-यह राशि राष्ट्रीय हरित अधिकरण बार एसोसिएशन में जमा कराई जाएगी
-इसका इस्तेमाल बिना वकील वाले याचिकाकर्ताओं को कानूनी मदद देने और पक्षकारों की सुविधाएं बेहतर करने में होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सुनवाई में शामिल न होने पर शहरी विकास मंत्रालय (एमओयूडी) पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए सेंथिल वेल और डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने कहा कि नोटिस मिलने के बावजूद मंत्रालय की ओर से कोई प्रतिनिधि पेश नहीं हुआ, जिससे मामले की सुनवाई में देरी हुई। पीठ ने स्पष्ट किया कि एनजीटी की कार्यवाही सामान्य मुकदमेबाजी की तरह नहीं है, जहां पक्षकार अपनी इच्छा से गैरहाजिर रह सकें। पर्यावरण कानूनों का पालन करना केंद्र सरकार और उसके विभागों की संवैधानिक जिम्मेदारी है, इसलिए उनकी मौजूदगी जरूरी है।
अधिकरण ने कहा कि मंत्रालय की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई टालनी पड़ी और पर्यावरण से जुड़े अहम मुद्दों के समाधान में देरी हुई। हालांकि, एनजीटी ने मंत्रालय को सुधार का अंतिम मौका दिया है, लेकिन इसके लिए एक लाख रुपये की लागत जमा करना अनिवार्य होगा। यह राशि राष्ट्रीय हरित अधिकरण बार एसोसिएशन में जमा कराई जाएगी। इस पैसे का इस्तेमाल बिना वकील वाले याचिकाकर्ताओं को कानूनी मदद देने और पक्षकारों की सुविधाएं बेहतर करने में किया जाएगा। एनजीटी ने यह भी कहा कि यदि मंत्रालय जुर्माने की राशि जमा नहीं करता है, तो बार एसोसिएशन इसकी वसूली के लिए कानूनी कार्रवाई कर सकेगी। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल 2026 को होगी।