नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली में औद्योगिक इकाइयों के जरिये भू-जल दोहन, उपयोग और खपत की स्पष्ट नीति तैयार करने के लिए दिल्ली सरकार, केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण व अन्य प्राधिकरणों को कड़ा आदेश दिया है।
प्रधान पीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा है कि यदि एक हफ्ते के भीतर सभी संबंधित प्राधिकरण मिलकर कोई किसी स्पष्ट नीति के नतीजे पर नहीं पहुंचते हैं तो सभी के खिलाफ दंडात्मक आदेश दिया जाएगा। अगली सुनवाई 9 फरवरी को होगी।
जस्टिस यूडी साल्वी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि दिल्ली में कई इलाके भू-जल के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। वहीं समूचे देश में भू-जल संबंधी नीति के लिए केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) ही जिम्मेदार है।
ऐसे में सीजीडब्ल्यूए एक हफ्ते के भीतर दिल्ली जल बोर्ड और 12-07-2010 को इस मामले के लिए बनाई गई समिति को ताजा आंकड़े और सुझाव दे। दिल्ली में औद्योगिक इकाइयों के जरिये भू-जल दोहन की कोई स्पष्ट नीति अभी तक नहीं तैयार हो पाई है।
दिल्ली जल बोर्ड का कहना है कि उनके पास 2013 तक ही भू-जल दोहन के आंकड़े हैं। विस्तृत प्लान के लिए ताजा आंकड़ों और सुझावों की जरूरत है। हाल ही में एनजीटी ने दिल्ली सरकार के संबंधित सचिव, दिल्ली राज्य औद्योगिक और आधारिक संरचना विकास निगम लिमिटेड (डीएसआईआईडीसी), केंद्रीय भू-जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) और दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को बैठक करने का आदेश दिया था।
वहीं नरेला और बवाना जैसे ऐसे स्थान जहां भू-जल का स्तर पहले से ही काफी कम है वहां औद्योगिक इकाइयों के जरिये भू-जल दोहन बेहद ही खतरनाक है।