नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तर प्रदेश सरकार को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों की वास्तविक संख्या और सही जानकारी न बताने के लिए कड़ी फटकार लगाई है। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को 10 करोड़ रुपये की परफॉरमेंस गारंटी जमा करने की शर्त पर एक महीने की मोहलत दी है।
जस्टिस आरएस राठौर की अध्यक्षता वाली ने कहा कि एक महीने के भीतर सरकार ट्रिब्यूनल को अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों की वास्तविक संख्या हलफनामा दाखिल करके बताए।
पीठ ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बताए गए कुल अस्पतालों व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों की वास्तविक संख्या में काफी अंतर है। पीठ ने स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाते हुए कहा कि आप वास्तविक संख्या बताने में सक्षम नहीं है। आखिर सरकार किस तरह से काम कर रही है।
पीठ ने गौर किया कि स्वास्थ्य विभाग के निदेशक की ओर से बताया गया था कि कुल 5,240 सरकारी अस्पताल राज्य में हैं वहीं, इससे पहले विभाग की ओर से कहा गया था कि कुल 1,643 अस्पताल राज्य में मौजूद हैं। पीठ ने कहा कि यह सरकार और उनके प्राधिकरणों की गंभीरता को प्रदर्शित करता है।
वहीं, सुनवाई के दौरान स्वास्थ्य विभाग के निदेशक ने बताया कि अस्पतालों की कुल बताई गई संख्या 5240 वास्तविक और पूरी नहीं है क्योंकि अभी सभी जिला अस्पतालों में सर्वे जारी है। कम से कम दो महीनों का समय इस सर्वे को पूरा करने के लिए चाहिए। इसके बाद पीठ ने 10 करोड़ रुपये की परफॉरमेंस गारंटी के साथ एक महीने में वास्तविक संख्या बताने का आदेश दिया है। पीठ ने 12 मार्च को अगली सुनवाई तय की है।
एनजीटी का यह आदेश याची शैलेश सिंह के मामले में आया है। याची ने सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर ठोस व जैविक कचरे के प्रबंधन नियमों और कानून का पालन न करने का आरोप लगाया था।