यमुना नदी को लेकर एनजीटी का फैसला।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यनल ने एक आदेश जारी किया है। इस आदेश में एनजीटी ने कहा कि यमुना को गंदा करने उसपर कचड़ा फेंकने या शौंच करने पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।
एनजीटी ने कहा कि यमुना तक पहुंचने वाले प्रदूषण के लगभग 67 प्रतिशत हिस्से का शोधन दिल्ली गेट और नजफगढ़ स्थित दो दूषित जल शोधन संयंत्रों द्वारा किया जाएगा। एनजीटी ने यमुना में खुले में शौच करने और कचरा फेंकने पर शुक्रवार से बैन लगा दिया है। अपने बयान में एनजीटी ने कहा कि जो भी इस कड़े आदेश का उल्लंघन करेगा उसे पांच हजार रूपए का पर्यावरण मुआवजा देना होगा।
दरअसल, एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली जलबोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की अध्यक्षता वाली एक समिति भी गठित की। इस समिती का नाम नदी की सफाई है। एनजीटी के अध्यक्ष ने समिति को नियमित समय दिया है।
इस अंतर्राल में रिपोर्ट देना होगा। दिल्ली सरकार और नगम निगमों को निर्देश दिया गया कि वे उन उद्योगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करें, जो आवासीय इलाकों में चल रहे हैं और नदी के प्रदूषण का बड़ा स्रोत हैं। एनजीटी द्वारा लगाए गए बैन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यमुना पहुंचने से पहले दूषित जल साफ हो जाए।