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एनजीटी की दिल्ली सरकार को फटकार, एक भी ऐसी कॉलोनी बताएं, जहां सफाई व्यवस्था ठीक हो

Thu, 20 Oct 2016 12:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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- फोटो : demo
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नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने राजधानी में मच्छर जनित बीमारियों के बढ़ते मामलों पर दिल्ली सरकार और स्थानीय निकायों के अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
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एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार ने बुधवार को कहा, ‘डेंगू-चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के बढ़ते मामलों की रोकथाम के लिए वे कुछ नहीं कर रहे हैं और एयर-कंडीशन कमरों में बैठे हुए हैं। अधिकारी एक भी ऐसी कॉलोनी बताएं जहां साफ-सफाई व्यवस्था दुरुस्त हो।’

गंभीर होते हालात के लिए सरकारी विभागों और निगमों को जिम्मेदार ठहराते हुए ग्रीन पैनल ने नाराजगी जताई और कहा कि वे एक भी ऐसी कॉलोनी का नाम बताने में विफल रहे जहां उचित साफ-सफाई व्यवस्था हो।
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एनजीटी अध्यक्ष ने कहा, ‘प्रशासनिक अधिकारी एयर कंडीशन कमरों में बैठे हुए हैं और कुछ नहीं कर रहे हैं। ट्रिब्यूनल के समक्ष कई सारे अधिकारी मौजूद थे लेकिन पूछे जाने पर एक भी अधिकारी यह बताने में नाकाम रहे कि डेंगू और चिकनगुनिया से मुकाबले के लिए उन्होंने क्या उपाय आजमाए हैं। मच्छरों के पनपने वाले क्षेत्रों की पहचान तक नहीं की गई है।’
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अविश्वसनीय दावों पर फटकार

demo pic - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा, ‘यह बताते हुए दुख होता है कि संबंधित अधिकारियों ने दिल्ली में सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से निपटने के लिए गंभीरता से और आपातकालीन स्तर पर काम नहीं किया। हमारे निर्देशों के बाद भी अधिकारी 21 सितंबर के हमारे निर्देशों का पालन करने में विफल रहे।

यदि संबंधित अधिकारी तत्परता से काम नहीं करते तो निश्चित तौर पर उन्हें नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का दोषी माना जाएगा।’ ट्रिब्यूनल ने आगाह किया कि यदि अधिकारी उसके आदेश का पालन नहीं करते हैं तो प्रत्येक सरकारी विभाग पर 50 हजार रुपये का जुर्माना ठोका जाएगा जो उस विभाग के जिम्मेदार अधिकारी के वेतन से वसूला जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को तय की गई।

अविश्वसनीय दावों पर फटकार
ट्रिब्यूनल के समक्ष डेंगू और चिकनगुनिया जैसे मामलों पर काबू पाने के दिल्ली सरकार, स्थानीय निकायों और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों के ‘अविश्सनीय दावों’ और ‘झूठे बयानों’ पर भी अध्यक्ष ने उन्हें फटकार लगाई और कहा कि दिल्ली सरकार ने स्थिति रिपोर्ट भी अब तक जमा नहीं कराई है। पैनल की पीठ वकील गौरव कुमार बंसल की ओर से पूर्व वैज्ञानिक द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई थी कि डेंगू पर काबू पाने के लिए अधिकारियों को थर्मल फॉगिंग कराने के निर्देश दिया जाएं।

सीएनजी वाहनों पर राज्यों से मांगी राय
देशभर में स्वच्छ ईंधन का इस्तेमाल शुरू करने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बुधवार को पांच उत्तरी राज्यों से राय मांगी है। ट्रिब्यूनल ने उनसे पूछा है कि वाहनों के लिए सीएनजी को मुख्य ईंधन बनाने पर उनका क्या रुख है। एक अन्य मामले में एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता में पीठ ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली से हलफनामा मांगा है। इन राज्यों को सीएनजी की सप्लाई वाले स्थानों से जुड़े शहरों और प्रस्तावित क्षेत्रों में इस व्यवस्था के बारे में ब्योरा मांगा गया है। ट्रिब्यूनल ने उनसे यह भी पूछा कि राज्यों और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के नजरिये में कौन सा ईंधन इस्तेमाल किया जाना चाहिए। पैनल ने पीएनजीआरबी से भी वितरण के लिए सीएनजी पाइपलाइन बिछाने की समग्र योजना की रिपोर्ट मांगी है। 
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