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अरावली में प्रदूषण रोकने में नाकामी पर एनजीटी नाराज, गुरुग्राम नगर निगम कमिश्नर तलब

Sun, 03 Mar 2019 03:40 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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ngt - फोटो : ngt
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अरावली क्षेत्र में हरियाणा सरकार की ओर से निर्माण गतिविधियों की इजाजत देने संबंधी कानून पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद शनिवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी इस क्षेत्र में ठोस कचरे की डंपिंग से होने वाले प्रदूषण पर रोक लगाने में विफल रहने पर गुरुग्राम निगम को कड़ी फटकार लगाई। ट्रिब्यूनल ने कचरे और उससे होने वाले खतरनाक गंदे पानी के रिसाव पर नगर निगम के कमिश्नर को तलब किया है। 
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पीठ ने कहा कि इस मामले को चार वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन ठोस कचरे से रिसाव होने वाले गंदे पानी के कारण अरावली क्षेत्र में भू-जल और सतह का जल लगातार प्रदूषित हो रहा है। ऐसे में कोई कड़ा आदेश जारी करने से पहले जरूरी है कि गुरुग्राम नगर निगम के कमिश्नर, मैसर्स इको ग्रीन एनर्जी गुरुग्राम फरीदाबाद प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और पर्यावरण मंत्रालय के संयुक्त सचिव ट्रिब्यूनल में पेश हों। 

जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली पीठ ने याची विवेक कंबोज के मामले में कहा कि अगले सप्ताह इस मामले की फिर सुनवाई की जाएगी। तलब किए गए सभी पक्षक्ष पूरी योजना के साथ ट्रिब्यूनल में आएं। साथ ही यह भी बताएं कि आखिर प्रदूषण रोकने में विफल रहने के लिए उन पर क्यों न जुर्माना लगाया जाए।  
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कचरा प्रबंधन नहीं करने पर जुर्माना भी लग चुका है


मैसर्स इको ग्रीन एनर्जी गुरुग्राम फरीदाबाद प्राइवेट लिमिटेड पर ठोस कचरा प्रबंधन नहीं करने के लिए पूर्व में 2.5 लाख रुपये का जुर्माना भी लग चुका है। हालांकि, इको ग्रीन एनर्जी का कहना है कि उसे सिर्फ करार के तहत तय ठोस कचरे को ही उठाना है जबकि ठोस कचरे के प्रदूषण को पूरी तरह रोकना स्थानीय प्राधिकरणों का काम है।

वहीं, पीठ ने गौर किया कि वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित करने के लिए चार वर्ष बीत चुके हैं लेकिन पर्यावरण मंजूरी नहीं जारी की गई है। पीठ ने कहा कि यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि अरावली में प्रदूषण फैलाया जा रहा है और इस कारण वन क्षेत्र, वन्यजीव और लोगों की सेहत पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में इस मामले में राहत के लिए शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए। 

सुप्रीम कोर्ट भी जता चुका है चिंता
अरावली क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों और इससे बढ़ने वाले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट भी कई बार चिंता जता चुका है। हाल ही हरियाणा सरकार ने विधानसभा में पंजाब भू संरक्षण (हरियाणा संशोधित) विधेयक (पीएलपीए) पारित किया, जिसके तहत अरावली-शिवालिक क्षेत्र में निर्माण गतिविधियों पर से रोक हटा दी गई। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी और स्पष्ट शब्दों में कहा कि वन क्षेत्र को इस तरह से नष्ट करने की इजाजत कतई नहीं दी जा सकती
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