सरकार नशा-मुक्त अभियान में जुटी एनजीओ को नशीली दवाइयां मुहैया करवाती है, लेकिन कई एनजीओ के लोग इन दवाओं की कालाबाजारी करते हैं। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने ऐसी ही एनजीओ के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान छतरपुर विस्तार निवासी फ्रेंकलिन लजारस (54) और किशनगढ़, वसंतकुंज निवासी मनीष कुमार (40) के रूप में हुई है। आरोपियों के पास से नशे की 3800 गोलियां बरामद की गई हैं। आरोपी मुफ्त मिलने वाली इन नशे की गोलियों को बेचकर मोटी कमाई करते थे।
अपराध शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त डॉ. अजीत कुमार सिंगला ने बताया कि सूचना मिली थी कि नशा-मुक्ति में मदद करने वाली दवाओं की कालाबाजारी एनजीओ के सदस्य कर रहे हैं। सरकार की ओर से ये दवाएं एनजीओ को मुफ्त में मिलती हैं। ऐसी नशे की गोलियां बेचने वाला एनजीओ एसपीवाईएम डी-एडिक्शन सेंटर किशनगढ़ वसंतकुंज का कर्मचारी सीएनजी स्टेशन वसंतकुंज के पास आने वाला है।
पुलिस ने वसंतकुंज से आरोपी फ्रेंकलिन को नशे की 3800 गोलियों के साथ दबोच लिया। उसकी निशानदेही पर एनजीओ के दूसरे कर्मचारी मनीष कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया। मनीष इन दवाइयों का कस्टोडियन था। आरोपियों ने बताया कि उनकी एनजीओ नाको (नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन) प्रोजेक्ट के तहत नशा करने वाले लड़कों का नशा छुड़ाने में मदद करती है।
इंजेक्शन से नशा करने वाले ज्यादातर लोग एक ही सीरिंज का इस्तेमाल करते हैं, जिससे में उनमें एचआईवी का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे लोगों को नशे से मुक्ति दिलाने व एचआईवी के खतरे को कम करने के लिए पहले इन लोगों को इंजेक्शन के बदले नशे की गोलियां दी जाती हैं, बाद में उन दवाईयों को भी धीरे-धीरे कम कर दिया जाता है। यह दवाइयां सरकार मुहैया कराती है। मनीष इन दवाइयों का कस्टोडियन था। फ्रेंकलिन के कहने पर उसने यह दवाइयां उसे दी। छानबीन के दौरान पता चला कि फ्रेंकलिन पहले खुद नशा करता था, लेकिन बाद में उसने नशा छोड़कर एनजीओ के साथ मिलकर नशा करने वाले लोगों की काउंसलिंग करने लगा। पुलिस दोनों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है।