बारिश के बाद टीकरी बॉर्डर पर गंदगी पसर गई है। आंदोलनकारी किसानों ने कहा कि उन्हें मुश्किलों का सामना जरूर करना पड़ रहा है, लेकिन वह नए कृषि कानूनों को रद्द कराकर ही दम लेंगे। वहीं, सोमवार को होने वाले अनशन के लिए भी यहां तैयारियां की जाती रही। दिनभर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों से किसानों के पहुंचने का सिलसिला भी जारी रहा। कड़ाके की ठंड में किसानों का हौसला कम नहीं हो रहा है। वह पूरे जोश के साथ अपनी मांगों के समर्थन में डटे हुए हैं। ब्यूरो
मेहमानों के लिए सरकार ने लगवाए मोबाइल टॉयलेट
आंदोलन स्थल के पास दिल्ली सरकार की ओर से मोबाइल टॉयलेट भी लगाए गए हैं। एक मोबाइल टॉयलेट के बाहर दिल्ली सरकार के बैनर पर लिखा है ये शौचालय पंजाब से आए दिल्ली के मेहमानों के लिए है, लेकिन उसके आसपास हर तरफ गंदगी और जलभराव होने की वजह से किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब हो रही है थोड़ी कमाई
मोबाइल चार्जर, ब्लूटूथ, पावर बैंच आदि सामान बेचने वाले मुकेश ने कहा कि आंदोलन के दौरान उसकी बिक्री बढ़ी है। लॉकडाउन के बाद पहली बार कमाई हो रही है। आंदोलनरत किसानों को किसी तरह की परेशानी न आए, इसलिए सभी जरूरी उपकरण रखे हुए हैं।
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलनकारी खा रहे पिज्जा
अमृतसर से पहुंचे पांच दोस्तों ने सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शनकारियों के लिए पिज्जा का लंगर लगाया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के अलावा स्थानीय निवासियों की भी लंबी लाइन लगी रही। पिज्जा लगाने वाले शानबीर सिंह संधू ने कहा कि उनके पास चपाती का लंगर लगाने के लिए अधिक समय नहीं था। इसलिए उन्होंने पिज्जा का लंगर लगाया। लंगर में शामिल शहनाज गिल ने कहा कि प्रतिदिन एक ही चीज खाते-खाते किसान ऊब गए होंगे। इसलिए उन्हें पिज्जा खिलाने का विचार आया। दूसरी ओर पहली बार लगे इस तरह के लंगर की लोगों ने सराहना की।
हरियाणा और पंजाब की सैकड़ों महिलाएं आंदोलन से जुड़ीं
आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में हरियाणा और पंजाब की सैकड़ों महिलाएं भी जुड़ गई हैं। घरेलू काम छोड़कर अपने परिजनों का साथ देने के लिए वे भी राजधानी की सीमाओं पर केंद्र के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं।लुधियाना की मनदीप ने कहा कि खेतों में फसल उगाने के लिए पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं की भी हिस्सेदारी होती है। इसलिए वह भी आंदोलन का हिस्सा बनी हैं।
सुखविंदर कौर ने कहा कि वे पांच घंटे बस की यात्रा और पैदल चलकर बॉर्डर पर किसानों के समर्थन के लिए पहुंची हैं। सभी किसान हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसलिए उनका साथ देना जरूरी है। किसानों के समर्थन के लिए पहुंची महिलाओं को परेशानियों का सामना जरूर करना पड़ रहा है, लेकिन वह पीछे नहीं हटेंगीं। देश के किसानों के साथ ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका समेत कई देश हैं। किसानों के लिए चाय, बिस्कुट, लंगर के अलावा सभी बुनियादी सुविधाएं मुहैया की गई हैं। इसके अलावा ड्राई फ्रूट, फल, खीर भी बांटी जा रही है।
75 वर्षीय दलजिंदर कौर ने कहा कि संघर्ष में किसानों के साथ हैं और उन्हें उम्मीद है कि सरकार इस मामले का जरूर कोई हल निकालेगी। जब तक कानूनों को वापस नहीं लिया जाएगा वह वापस यही डटी रहेंगीं।