अव्यवस्थाओं को लेकर अक्सर सुर्खियों में रहने वाले दिलशाद गार्डन स्थित गुरु तेग बहादुर अस्पताल में एक बार फिर घोर लापरवाही सामने आई है। एक शिशु की मौत महज इसलिए हो गई कि उसे वेंटिलेटर नहीं मिल पाया।
परिजनों का आरोप है कि शिशु दो दिनों तक अस्पताल परिसर में ही जिंदगी और मौत से जूझता रहा, लेकिन वेंटिलेटर नहीं मिल पाया। इस बीच परिजन उसे अंबू बैग के जरिये ऑक्सीजन देते रहे।
पूर्वी दिल्ली के वेलकम निवासी रामनरेश ने बताया कि 22 जून को उनकी बहू रेखा को प्रसव पीड़ा हुई। वह उसे अस्पताल ले गए, जहां उसने पुत्र को जन्म दिया। डॉक्टरों ने रेखा और शिशु की तबीयत सही होने का हवाला देकर घर भेज दिया, लेकिन 27 जून को शिशु की हालत बिगड़ने लगी।
इसके बाद उसे तत्काल गुरु तेग बहादुर अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने शिशु के परिजनों को एक अंबू बैग दे दिया और कहा कि अस्पताल में वेंटिलेटर खाली नहीं है। परिजन 2 दिनों तक अंबु बैग से शिशु को ऑक्सीजन देते रहे, परंतु शिशु के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ।
बच्चे ने वेंटिलेटर नहीं मिलने के अभाव में दम तोड़ दिया। इस संबंध में गुरु तेग बहादुर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सुनील कुमार ने घटना के बारे में कोई जानकारी ना होने की बात कही है।