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Delhi NCR News: एनसीआर में सड़क की धूल कम करने के लिए एमआरएसएम पर नए नियम लागू

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-सीएक्यूएम ने एनसीआर और आस-पास के इलाकों में सड़क मालिकों और सफाई एजेंसियों को निर्देश दिया
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-इन नियमों के अनुसार एमआरएसएम का इस्तेमाल और तैनाती करें

संवाद न्यूज एजेंसी

नई दिल्ली।
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सड़क की धूल और प्रदूषण को कम करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने मैकेनाइज्ड रोड स्वीपिंग मशीन (एमआरएसएम) के इस्तेमाल और संचालन के लिए विस्तृत तकनीकी और ऑपरेशनल नियम जारी किए हैं। सीएक्यूएम ने एनसीआर और आस-पास के इलाकों में सड़क मालिकों और सफाई एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे इन नियमों के अनुसार एमआरएसएम का इस्तेमाल और तैनाती करें। सड़क की धूल विशेष रूप से सूखे मौसम में पीएम10 और पीएम2.5 प्रदूषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

एनसीआर में सड़कों की चौड़ाई और बनावट अलग होने के कारण एमआरएसएम की अलग-अलग कैटेगरी के नियम बने हैं। नए नियमों के अनुसार, बड़े एमआरएसएम का इस्तेमाल चौड़ी सड़कों पर होगा, मीडियम मशीनें 10-15 मीटर चौड़ी सड़कों पर और छोटे एमआरएसएम 10 मीटर से कम चौड़ी सड़कों पर सफाई करेंगी। सभी मशीनों में धूल को दबाने के लिए वॉटर स्प्रे और पीएम डस्ट फिल्टर सिस्टम होना अनिवार्य है। नए फ्लीट में केवल सीएनजी या इलेक्ट्रिक मशीनें ही शामिल होंगी, ताकि प्रदूषण में और कमी आए।
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ऑपरेशनल नियमों के अनुसार, एमआरएसएम को रोजाना कम से कम 8 घंटे काम करना होगा। बड़े और मीडियम 8 घंटे में लगभग 40 किलोमीटर और छोटे एमआरएसएम 20 किलोमीटर तक सड़क की सफाई करेंगे। मशीनों की संख्या सड़क की लंबाई और धूल की जरूरत के हिसाब से तय की जाएगी। इसके अलावा, फुटपाथ और सड़क किनारे की सफाई के लिए हैंडहेल्ड वैक्यूम क्लीनिंग मशीन और कूड़ा उठाने वाली मशीनें भी इस्तेमाल की जाएंगी, और जमा हुई धूल को वैज्ञानिक तरीके से निपटाया जाएगा।
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