आने वाला समय सिर्फ गुड़गांव ही नहीं देश भर के आईटी हब के लिए चुनौतीपूर्ण है। दुनिया में अपने आईटी हब के माध्यम से धूम मचाने वाले भारत को एशिया के अन्य छोटे-छोटे देश अब चुनौती देने लगे हैं।
इनमें थाइलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर के नाम प्रमुख हैं। वहां आईटी-बीपीओ का शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हो गया है। यही नहीं वह पश्चिमी देशों कनाडा, अमेरिका और ब्रिटेन से कारोबार भी हासिल करने लगे हैं। आईटी विशेषज्ञों की मानें तो यह सब कुछ भारत की कीमत पर हो रहा है।
गुड़गांव, नोएडा, हैदराबाद और बंगलूरू के आईटी-बीपीओ हब को सबसे अधिक कारोबार (आउटसोर्सिंग) अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देशों से होता है। अब इसमें एशिया के छोटे देशों की भी हिस्सेदारी हो गई है।
हाइटेक इंडिया के अध्यक्ष प्रदीप यादव ने कहा कि इन देशों की सरकारें अपने आईटी हब को और प्रगतिशील बनाने का काम कर रही हैं। वहां निवेश करने वाली कंपनियों को टैक्स से लेकर अन्य सभी प्रकार की शानदार बुनिदयादी सुविधाएं दे रही हैं। जो भारत के आईटी हब को नहीं मिल रही है।
सरकार नहीं दे रही कोई राहत
मलेशिया के शहर पुत्रजय में बेहतरीन आईटी हब है। यह हब दुनिया की बड़ी आईटी-बीपीओ कंपनियों को आकर्षित कर रहा है। इसके मुकाबले गुड़गांव में कोई नई आईटी-बीपीओ कंपनी नहीं आ रही है। ना यहां सरकार की ओर से कोई राहत दी जा रही है।
विश्व के पहले ग्रामीण महिला बीपीओ हर्वा के सीईओ अजय चतुर्वेदी का कहना है कि इस बारे में चौकन्ना होने की जरूरत है। अगर देश के आईटी हब इस मामले में पिछड़ गए तो आने वाले समय में काफी मुश्किल हो सकती है।
नैस्कॉम हरियाणा के को-चेयरमैन राकेश कपूर का कहना है कि गुड़गांव के आईटी हब में काफी समस्याएं हैं। इस कारण कंपनियों का यहां से मोह भंग हो रहा है।
अब चीन भी उभर रहा है
गुड़गांव के आईटी-बीपीओ हब ने अपना सफर 11,000 करोड़ रुपये से शुरू किया था। जो वर्ष 2008-09 में 15,000 करोड़ रुपये हो गया। वर्ष 2011-12 में यह 21,400 करोड़ हो गया।
वर्ष 2012-13 में यह 25,000 करोड़ रुपये के स्तर को छुआ। वर्ष 2013-14 में गुड़गांव के आईटी हब का कारोबार 31,200 करोड़ रुपये के स्तर पर है।
प्राइम कॉल इंटरनेशनल की डायरेक्टर एचआर विनीता यादव का कहना है कि आईटी-बीपीओ सेक्टर में अपनी भाषाई समस्या के कारण चीन आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
मगर अब वहां यह परेशानी खत्म होने लगी है। वहां के आईटी हब से भी भारत को तगड़ी चुनौती मिलने जा रही है।