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'पुलिस की लापरवाही से बढ़े दलितों पर अत्याचार'

Wed, 14 Sep 2016 12:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
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पु‌लिस - फोटो : अमर उजाला
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मेवात में दलितों पर हो रहे अत्याचार के लिए पूरी तरह से जिला प्रशासन व पुलिस की नाकामी जिमेदार हैं। मेवात में रह रहे दलितों के लिए आजादी के कोई मायने नहीं हैं, इन्हें आज भी गुलामों की तरह शोषण सहकर जीना पड रहा है। 
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दलितों के साथ एक घटना होती है, तो पुलिस उसमें पीडितों की न्याय दिलाने में नाकाम रहती है, जिसके चलते तुरंत दूसरी घटना को अंजाम दे दिया जाता हैं। 

ये बातें अनूसूचित जाति आयोग के चेयरमैन ईश्वर सिंह ने अमर उजाला से फोन पर हुई बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि मेवात में हाल ही में 7 केस दलितों पर अत्याचार के सामने आए है, जिनमें ज्यादातर में दलितों की बहन-बेटियों को मेवात के बहुसंयकों ने निशाना बनाया हैं। 

वे स्वयं बुधवार को नूंह पहुंचेंगे और पुलिस व प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्यवाई की समीक्षा करेंगे। इसके बाद वे प्रत्येक पीडित परिवार से मिलने उनके घर जाएंगे और उनकी समस्या सुनेंगे। 
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नवलगढ़ बिछोर मामले में दलित की बेटी के साथ बलात्कार कर उसे गर्भवती किया गया और इतना डराया व धमकाया गया कि वे गांव से पलायन करने को मजबूर हो गए। 

पुलिस ने मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन आरोपियों पर कोई कार्यवाई न करने से दलितों पर लगातार अत्याचार बढता चला गया। नीमखेडा से दलित परिवार पलायन कर चुके हैं तो पुन्हाना में मां-बाप के सामने दिनदहाडे एक बेटी को हथियार के बल पर उठाया गया हैं।

 जिसमें पुन्हाना में पीडित परिवार व अन्य लोगों ने पंचायत कर पुलिस की कार्यवाई से नाराजगी जताते हुए पुलिस का पुतला भी फूंका हैं। गोहाना से दलित परिवार पलायन कर चुका हैं, इस प्रकार के कई मामले उनके संज्ञान में हैं और वे बुधवार को हर पीडित परिवार से मिलेंगे। 

पुलिस व प्रशासन की लापरवाही इस मामले में खुलकर सामने आ रही हैं और वे सरकार व उच्चाधिकारियों को सिफारिश करेंगे कि मेवात पुलिस व जिला प्रशासन पर इस मामले में लापरवाही बरतने पर कार्यवाई करें।
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